महाराजगंज में बीजेपी का चेहरा माने जाने वाले पंकज चौधरी सांसद बने और 2019 में छठी बार लोकसभा में सीट हासिल की। भारतीय जनता पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के महाराजगंज से छह बार सांसद रहे पंकज चौधरी आज मोदी कैबिनेट में केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री हैं।
गोरखपुर में जन्मे और पढ़े-लिखे 57 वर्षीय व्यक्ति के पास पार्षद से लेकर संसद सदस्य बनने तक का अनुभव है। 1964 में गोरखपुर में जन्मे पंकज चौधरी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
पंकज चौधरी 1991, 1996, 1998, 2004, 2014 में सांसद चुने गए। 2019 में वह छठी बार सांसद चुने गए और अब मोदी कैबिनेट में केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।
बता दें कि पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर नगर निगम गोरखपुर से शुरू हुआ। 1989-91 में पहली बार वह गोरखपुर नगर निगम में पार्षद चुने गये। इसके बाद 1990-91 तक वह गोरखपुर नगर निगम में डिप्टी मेयर रहे। यही वह साल था जब उन्हें पहला बड़ा ब्रेक मिला। 1991 में ही उन्हें प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी समिति का सदस्य बनाया गया।
1991 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें महराजगंज से टिकट मिला और जीत हासिल की। चौधरी 1991 में पहली बार सांसद बने। 1996 में उन्होंने दोबारा जीत हासिल की। उस समय उन्हें कई संसदीय समितियों का हिस्सा बनने का मौका भी मिला।
1998 में मध्यावधि चुनावों के दौरान, पंकज चौधरी फिर से जीते और कई अन्य संसदीय समितियों के सदस्य बने। 2004 में वह चौथी बार सांसद बने। 2014 में पांचवीं बार और 2019 में छठी बार सांसद चुने गए। आजादी के बाद लगातार तीन बार हैट्रिक लगाने वाले सांसद चुने जाने का रिकार्ड भी उन्हीं के नाम है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंकज चौधरी दूसरी बार हैट्रिक लगाने के लिए क्षेत्र में जन – जन तक पहुंचकर केन्द्र और प्रदेश सरकार द्वारा किए गए विकास की योजनाओं को भी बताने का कार्य बखूबी कर रहे हैं। अभी हाल ही में आनन्द नगर वाया महराजगंज से घुघुली तक रेल लाइन की स्वीकृति से उनका कद और बढ़ गया है। क्षेत्र की जनता इसको लेकर काफी उत्साहित है और खुश है।
वहीं अमर मणि त्रिपाठी 1981और 1984 में वीरेंद्र प्रताप शाही से चुनाव हार गए। 1989 में अमर मणि त्रिपाठी कुंअर अखिलेश सिंह को हराकर पहली बार विधायक बने। लेकिन 1991और 1993 में लगातार दो बार कुंअर अखिलेश सिंह से चुनाव हार गए। पुनः 1996 , 2002 और 2007 में लगातार तीन बार जीत कर अमर मणि त्रिपाठी ने हैट्रिक लगाकर एक इतिहास रच दिया। एक समय ऐसा आया कि उनकी लोकप्रियता को देखते हुए विरोधी पूरी तरह पश्त होते नजर आए। अमर मणि त्रिपाठी उस समय मधुमिता शुक्ला हत्या काण्ड में जेल में बंद थे। उन्होंने 2012 का चुनाव अपने पुत्र अमन मणि त्रिपाठी को लड़ाया पर वह कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह से हार गए। उस समय मुन्ना सिंह की एक भावुक अपील जनता के दिलों में घर कर गई और उन्हें पहली बार जीत का सेहरा पहना दिया। मुन्ना सिंह चुनाव के दौरान मंच से कहा करते थे कि आप लोग बाप से तो लगातार हराते रहे क्या अब बेटे से भी हरा हराऐंग। उन्होंने यह भी अपील किया था कि यह उनका अंतिम चुनाव है। इस भावुक अपील ने उन्हें विधायक बना दिया। लेकिन अपने बेटे की हार से अमर मणि त्रिपाठी जरा भी विचलित नहीं हुए थे,और जेल में रहते हुए अपने पुत्र अमन मणि त्रिपाठी को 2017 में निर्दल लड़ा कर भारी मतों के अंतर से चुनाव अपने पुत्र के पक्ष में कर लिया। जेल में रहने के बाद भी अमर मणि त्रिपाठी की लोकप्रियता में कभी कमी नहीं आई। परन्तु 2022 के चुनाव में मोदी लहर में निषाद-भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी ऋषि त्रिपाठी से कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह और अमन मणि त्रिपाठी दोनों चुनाव हार गए। अब बीस साल बाद जेल से रिहाई के बाद नौतनवां विधान सभा क्षेत्र की जनता अमर मणि त्रिपाठी की तरफ पुनः आकर्षित हो रही है। हालांकि कि अमर मणि त्रिपाठी अब कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। परन्तु जनता उन्हें आज भी अपना रहनुमा मानने को तैयार दिख रही है। आम जन में यह चर्चा जोरों पर है कि अमर मणि त्रिपाठी केवल बाहर रह कर क्षेत्र में रहेंगे तो भी क्षेत्र के विकास के साथ – साथ किसी भी व्यक्ति का उत्पीड़न नहीं होगा। हालांकि अमर मणि त्रिपाठी अपने 42 साल के राजनैतिक कैरियर में 21 साल जेल में बिताए पर आज भी उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। अब आने वाले 2024 के लोक सभा चुनाव में जहां वर्तमान सांसद व केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी के लोकप्रियता का इम्तिहान है वहीं दूसरी तरफ 2027 में अमर मणि त्रिपाठी की लोकप्रियता का भी इम्तिहान होगा। ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा?