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सूर्य को व्रतधारी महिलाओं ने दिया अर्घ्य घाट पर रही भारी भीड़

ByJyoti Nishad

Nov 20, 2023

अयोध्या/कुमारगंज। नगर पंचायत कुमारगंज के वार्ड नं 03 घाट (वर्मा के ताल) पर छठ पूजा बडे धूमधाम से मनाया गया, जिसमे भारी संख्या मे महिलाओं ने भाग लिया।

भारत के सबसे कठिन व्रतों में शामिल इस छठ महापर्व में अपने संतानों की कुशलता, उसकी सुख समृद्धि एवं दीर्घायु हेतु कामना की जाती है। इसके प्रथम चरण में नहाय खाय की परंपरा के साथ इसका शुभारंभ हुआ था। दूसरे दिन खरना व तीसरे दिन डूबते सूरज को अर्घ्य दिया। वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है लेकिन इसमें दो दिन पहले यानी चतुर्थी तिथि को नहाए खाए कि साथ छठ पूजा की शुरुआत हो जाती है। छठ का पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि को दिया जाता है यह अर्घ्य आस्ताचल गामी सूर्य को दिया जाता है। इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है। माना जाता है कि सूर्य की एक पत्नी का नाम प्रत्यूष है और यह अर्घ्य उन्हीं को दिया जाता है।

अर्घ्य देने के लिए एक लोटे में जल लेकर उसमें कुछ बूदे कच्चा दूध मिलाये जाते हैं इसी पात्र में लाल चंदन, चावल ,लाल फूल और कुश डालकर प्रसन्न मन से सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के बीचो-बीच लाकर सूर्य मंत्र का जाप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पुष्पांजल अर्पित किया जाता है इसके अगले दिन भोर में उषा अर्घ्य देकर पारण करते हुए व्रत का समापन होता है। प्रशासन व पुलिसकर्मियों के साथ-साथ स्वयंसेवकों व छठ पूजा समिति के कार्यकर्ताओं की टीम इस पर्व को सकुशल संपन्न कराने हेतु प्रयासरत है। सुरक्षा के मद्देनजर घाट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही समेत काफी संख्या में महिला, पुरुष व बच्चे मौजूद रहे।

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