काठमांडू/बीजिंग। नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। ग्लेशियर और भूस्खलन से जुड़ी इस आपदा में अब तक 676 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें नेपाल में 669 और चीन के तिब्बत क्षेत्र में सात मौतें शामिल हैं। वहीं करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिक, पर्यटक, तीर्थयात्री और स्थानीय लोग शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चिंता भारतीय नागरिकों को लेकर है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 287 भारतीय नागरिकों के अभी भी लापता होने की जानकारी है, जबकि चार भारतीयों को रसुवा के एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से सुरक्षित निकाला गया है। भारतीय अधिकारियों की ओर से नेपाल और चीन के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने और राहत-बचाव अभियान में सहयोग किया जा रहा है।
भोटेकोशी नदी ने मचाई भारी तबाही
26 अगस्त को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। बाढ़ के तेज बहाव और मलबे ने सड़कें, पुल, इमारतें और कई बस्तियां प्रभावित कर दीं। पहाड़ी इलाकों में राहत और बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बाढ़ के बाद कई इलाकों का संपर्क टूट गया था। संचार और सड़क व्यवस्था प्रभावित होने के कारण लापता लोगों तक पहुंचने में भी बचाव टीमों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
करीब 3 हजार लोग अब भी लापता
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में करीब 3,000 लोगों के लापता होने की सूचना है। नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान फिर से तेज किया गया है। खराब मौसम और पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभियान में लगातार चुनौतियां सामने आ रही हैं। नेपाल में अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का काम जारी है।
287 भारतीयों की तलाश, चार को किया गया रेस्क्यू
भारतीय नागरिकों को लेकर भी लगातार अपडेट सामने आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार रसुवा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से चार भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 287 भारतीयों के अब भी लापता होने की सूचना है। लापता भारतीयों में पर्यटक, तीर्थयात्री और काम के सिलसिले में नेपाल गए लोग शामिल हो सकते हैं। उनके परिजनों की चिंता लगातार बढ़ रही है और सरकार की ओर से संबंधित देशों के प्रशासन के साथ समन्वय किया जा रहा है।
तिब्बत में भी भारी तबाही, शी जिनपिंग ने की आपात समीक्षा
नेपाल सीमा से लगे चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरॉन्ग काउंटी में भी बाढ़ और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया है। चीन में सात लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस आपदा के बाद उच्चस्तरीय बैठक कर राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा की। चीनी बचाव दल कठिन रास्तों को पार करते हुए प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचा है।
बैरियर लेक से फिर बढ़ा खतरा
आपदा के बीच तिब्बत में बनी बैरियर लेक को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अधिकारियों और विशेषज्ञों की निगरानी में झील के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। यदि प्राकृतिक अवरोध टूटता है तो निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि ताजा रिपोर्टों के अनुसार झील के जलस्तर में कमी आने की बात सामने आई है, फिर भी संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी और बचाव व्यवस्था जारी है।
भारत ने बढ़ाई हिमालयी क्षेत्र में निगरानी
नेपाल की आपदा के बाद भारत ने भी हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है। खासकर नेपाल और चीन से लगती सीमा के आसपास संभावित खतरों पर नजर रखी जा रही है।
राहत-बचाव अभियान जारी, परिवारों को अपनों की तलाश
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अब भी युद्धस्तर पर जारी है। मलबे में दबे लोगों की तलाश, सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने और शवों की पहचान जैसी चुनौतियां बचाव एजेंसियों के सामने हैं। नेपाल ने तकनीकी मदद के लिए भारत और चीन से भी सहयोग मांगा है। इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भारी मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका के बीच सबसे बड़ी उम्मीद अब उन हजारों लोगों को सुरक्षित निकालने पर टिकी है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।