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सीएम योगी से मिले जापानी राजदूत ओनो केइची, सेमीकंडक्टर से पर्यटन तक यूपी-जापान सहयोग बढ़ाने पर मंथन

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तर प्रदेश और जापान के बीच निवेश, उन्नत प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, कौशल विकास, रोजगार, मानव संसाधन और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश जापान के साथ अपने आर्थिक और औद्योगिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए तैयार है। प्रदेश में जापानी निवेशकों के लिए एमएसएमई से लेकर बड़े उद्योगों तक व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। दोनों पक्षों के सहयोग से इन संभावनाओं को निवेश और रोजगार के ठोस अवसरों में बदला जा सकता है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ेगा जापान-यूपी सहयोग

बैठक में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। जापानी पक्ष ने बताया कि जुलाई 2026 में जापान के प्रधानमंत्री ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान सेमीकंडक्टर को जापान-भारत आर्थिक सुरक्षा सहयोग के पांच प्राथमिक क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
इसी क्रम में जापानी उद्योग जगत की एक टीम सितंबर के मध्य में सेमीकॉन इंडिया के साथ एचसीएल टेक्नोलॉजीज का दौरा करेगी। जापानी पक्ष ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए अपनी टीम के उत्तर प्रदेश दौरे की भी बात कही। सीएम योगी ने कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकी के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता के बीच व्यापक सहयोग की संभावनाएं हैं।

जापानी कंपनियों के लिए यूपी में निवेश के बड़े अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का विशाल बाजार, बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत औद्योगिक आधार और तेजी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर जापानी कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। नोएडा स्थित जापान सिटी भारत-जापान औद्योगिक साझेदारी का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। यामाहा, डेंसो, एनटीटी डेटा, टोयो इंक और पैनासोनिक जैसी जापानी कंपनियां उत्तर प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। जापान सिटी के आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और बेहतर कनेक्टिविटी निवेश की संभावनाओं को और मजबूत कर रहे हैं। कुबोटा की ओर से ट्रैक्टर और निर्माण मशीनरी के विनिर्माण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। बैठक में जेईटीआरओ और जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सहयोग से प्रदेश में जापानी निवेश को और विस्तार देने पर चर्चा हुई।

जापानी उद्योगों के लिए तैयार होगी यूपी की युवा प्रतिभा

मानव संसाधन विकास और कौशल प्रशिक्षण को भी बैठक में प्रमुखता दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ी युवा आबादी है, जिसे जापानी उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सकता है। जापान के तकनीकी प्रशिक्षण और विशिष्ट कौशल श्रमिक कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश के युवाओं को जापान में काम करने और अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने के अवसर मिल रहे हैं। दोनों पक्षों ने ऐसे स्किल डेवलपमेंट सेंटर विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की, जहां जापानी उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार युवाओं को तकनीकी और रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा सके।

जापान में रोजगार के लिए युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

विनिर्माण, कृषि और नर्सिंग केयर समेत विभिन्न क्षेत्रों में जापान में उपलब्ध रोजगार अवसरों के लिए उत्तर प्रदेश के युवाओं को तैयार करने पर भी विचार हुआ। आगरा के आरबी पीजी कॉलेज में कृषि क्षेत्र में जापान में रोजगार के अवसरों को लेकर आयोजित रोजगार मेले का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच मानव संसाधन सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। एमिटी विश्वविद्यालय और जापान के इबाराकी प्रीफेक्चर के बीच विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और प्रशिक्षण के अवसर विकसित करने के समझौते को भी महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में यूपी की भागीदारी

बैठक में पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।जापानी पक्ष ने सितंबर में आयोजित होने वाले टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में उत्तर प्रदेश की सहभागिता का अनुरोध किया, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया।उत्तर प्रदेश के बौद्ध, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन स्थलों को जापानी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने के लिए यह आयोजन महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। वर्ष 2025 में 2.19 लाख जापानी नागरिकों ने भारत की यात्रा की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.5 प्रतिशत अधिक है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जापानी पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने की दिशा में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

सारनाथ और नारा की बौद्ध विरासत बनेगी सहयोग का आधार

भारत और जापान की साझा बौद्ध एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन और जनस्तरीय संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रेखांकित किया गया। सारनाथ और जापान के नारा के बीच बौद्ध एवं सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों के ऐतिहासिक जुड़ाव को दर्शाते हैं। वर्ष 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होंगे। इस अवसर को पर्यटन, संस्कृति और दोनों देशों के बीच जनस्तरीय संबंधों को और मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

200 से अधिक जापानी प्रतिनिधि यूपी दौरे पर

उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक के सिलसिले में जापान के उद्योग जगत के 200 से अधिक प्रतिनिधियों का दल इस समय उत्तर प्रदेश की यात्रा पर है। विभिन्न क्षेत्रों में जापानी निवेशकों के साथ हुए संवाद के परिणामस्वरूप कई एमओयू भी हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से करीब 10 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश, तकनीकी साझेदारी और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसरों को गति मिलने की उम्मीद है।

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