नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के अमल पर रोक लगा दी, जिसमें आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द करने के साथ पांच लाख रुपये का मुआवजा देने और इसकी वसूली गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम तथा मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से करने का निर्देश दिया गया था।
मेधा रूपम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश के संबंधित हिस्सों पर अंतरिम रोक लगाई। साथ ही आकृति चौधरी को नोटिस जारी कर मेधा रूपम की याचिका पर उनका जवाब मांगा गया है।
पांच लाख रुपये के मुआवजे की वसूली पर भी रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था। आदेश में इस राशि की वसूली डीएम मेधा रूपम और हिरासत की प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों के वेतन से करने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस आदेश के अमल पर रोक लगा दी है।
NSA हिरासत रद्द करने वाले आदेश पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत रद्द करने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के संचालन पर भी रोक लगाई है। रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 27 से 33 के अमल पर अंतरिम रोक लगाई गई है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो सितंबर को आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द करते हुए हिरासत के आधार और प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की थीं। हाईकोर्ट के मुताबिक हिरासत के लिए प्रस्तुत सामग्री पर्याप्त नहीं थी। अदालत ने अधिकारियों की भूमिका पर भी टिप्पणी की और मुआवजे का आदेश दिया था।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी?
सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दलील दी गई कि NSA के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अधिकारियों और संबंधित प्राधिकारियों की भूमिका थी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि डीएम ने पुलिस और अन्य अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई की थी। मेधा रूपम की ओर से भी यही तर्क रखा गया कि पूरी प्रक्रिया में उन्हें अकेले जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश अंतरिम है। आकृति चौधरी को नोटिस जारी किया गया है और मामले में आगे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर अदालत विचार करेगी।