न्यूयॉर्क। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में गुरुवार को बेहद आक्रामक अंदाज में अपना पक्ष रखा। उनके भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए। इस पर नेतन्याहू ने वॉकआउट करने वाले प्रतिनिधियों को निशाना बनाते हुए कहा कि अगर हॉल में कोई और “नैतिक रूप से कायर” बचा है तो वह भी बाहर चला जाए। इसके बाद उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, 7 अक्टूबर 2023 के हमले, गाजा युद्ध और गोलान हाइट्स समेत कई मुद्दों पर इजरायल का पक्ष रखा।
‘ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला नहीं करते तो हम सब मारे जाते’
नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर इजरायल के सैन्य हमले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता को नष्ट करना आसान नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में यह उनके लिए सबसे आसान फैसलों में से एक था, क्योंकि अगर इजरायल ने ऐसा नहीं किया होता तो “हम सब मारे जाते।”
उन्होंने कहा कि करीब 14 साल पहले उन्होंने इसी मंच से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लाल रेखा खींची थी और अब इजरायल ने उस खतरे को रोकने का काम किया है। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि इजरायल की कार्रवाई से केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि दूसरे देश भी सुरक्षित हुए हैं।
‘अमेरिका और हमने मिलकर ईरान की सेना को कुचला’
नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ संघर्ष में अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा साझेदार रहा है। नेतन्याहू के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान की सेना, नौसेना, वायुसेना और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। उन्होंने ट्रंप के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने खुद को और व्यापक रूप से दुनिया को खतरे से बचाने के लिए साथ काम किया।
7 अक्टूबर को बताया 16 सितंबर 11 के हमलों के बराबर
नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन करीब 1,200 इजरायली मारे गए। उन्होंने इजरायल की आबादी के अनुपात के आधार पर इसकी तुलना अमेरिका में करीब 40 हजार लोगों की मौत से की और इसे 9/11 के हमलों के 16 गुना के बराबर बताया।
उन्होंने कहा कि उस हमले के बाद इजरायल के दुश्मनों को लगा था कि देश टूट जाएगा, लेकिन इजरायल ने जवाब दिया और लड़ाई जारी रखी। नेतन्याहू ने इजरायल के मौजूदा संघर्ष को “सात मोर्चों” पर चल रही लड़ाई के रूप में पेश किया।
प्रतिनिधियों के वॉकआउट पर बोले- ‘नैतिक कायर’
नेतन्याहू के भाषण शुरू करने से पहले और उनके मंच पर पहुंचते ही कई प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र महासभा कक्ष से बाहर निकल गए। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अगर कोई और “नैतिक रूप से कायर” हॉल में रह गया है तो वह भी बाहर चला जाए।
उन्होंने दावा किया कि हॉल से बाहर जाने वाले देशों के कुछ नेता निजी तौर पर इजरायल की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए धन्यवाद देते हैं। यह दावा नेतन्याहू ने अपने भाषण में किया; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उन्होंने सार्वजनिक रूप से पेश नहीं की।
ब्रिटेन और फ्रांस पर भी निशाना
नेतन्याहू ने इजरायल पर औपनिवेशिकता के आरोपों का विरोध करते हुए ब्रिटेन और फ्रांस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिकता का आरोप लगाने वालों में वे देश भी शामिल हैं जिनका खुद का औपनिवेशिक इतिहास रहा है।
उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इजरायल को लेकर आलोचना का भी जवाब दिया और पश्चिमी यूरोपीय देशों पर इजरायल के खिलाफ “कमजोरी” और “तुष्टीकरण” का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया। ये नेतन्याहू के भाषण में व्यक्त किए गए राजनीतिक आरोप हैं।
गोलान हाइट्स पर सीरिया को जवाब- ‘बाइबल पढ़ें’
नेतन्याहू ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की टिप्पणियों का जवाब देते हुए गोलान हाइट्स का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यहूदी बाइबिल के समय से गोलान हाइट्स में रहे हैं और सीरियाई राष्ट्रपति को बाइबल पढ़ने की सलाह दी।
गोलान हाइट्स को लेकर इजरायल और सीरिया के बीच लंबे समय से विवाद है। नेतन्याहू ने अपने भाषण में इस क्षेत्र पर इजरायल के दावे को ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों से जोड़कर पेश किया।
गाजा में नरसंहार के आरोपों को किया खारिज
नेतन्याहू ने गाजा में इजरायल के खिलाफ लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि इजरायल ने नरसंहार नहीं किया बल्कि अपने लोगों को नरसंहार से बचाया है। उन्होंने गाजा में मानवीय सहायता और पोलियो टीकाकरण का भी उल्लेख किया।
इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विवाद बना हुआ है। दक्षिण अफ्रीका की ओर से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामला चल रहा है और सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र जांच आयोग ने इजरायल पर नरसंहार का आरोप लगाया था, जिसे इजरायल ने खारिज किया है। मामले पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी लंबित है।
ईरान को लेकर बोले- ‘यह शासन गिरेगा‘
अपने भाषण के दौरान नेतन्याहू ने ईरान के शासन को लेकर भी कहा कि एक दिन ईरानी लोग स्वतंत्र होंगे और मौजूदा शासन का पतन होगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मंच से ईरानी लोगों तक इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात पहुंचाने की बात भी कही और एक स्टारलिंक टर्मिनल का प्रदर्शन किया।
नेतन्याहू ने भाषण का समापन इजरायल के संघर्ष जारी रखने के संकल्प के साथ किया। उन्होंने कहा कि इजरायल “जीतेगा” और उसके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।