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UP News: 2017 से पहले बच्चों के पोषाहार में शराब माफिया का दखल था, तीन-तीन महीने नहीं पहुंचता था राशन: CM योगी

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बच्चों के पोषाहार की आपूर्ति तक में शराब माफिया का दखल था। कई बार तीन-तीन महीने तक आंगनवाड़ी केंद्रों पर राशन नहीं पहुंचता था। बच्चों को अपना टाट लेकर केंद्रों पर आना पड़ता था। न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय और न ही गर्म भोजन की सुविधा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गलती कोई और करता था, लेकिन उसकी गाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को मिलती थी। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश सरकार ने पोषाहार वितरण की व्यवस्था में बदलाव कर इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की।

मुख्यमंत्री ने वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और उनके परिवारों के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल को लेकर सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया, नन्हे बच्चों को गोद में लेकर दुलारा और उनका अन्नप्राशन कराया। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आईं आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से संवाद भी किया गया।

‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ की अवधारणा पर आगे बढ़ रहा यूपी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं को रामराज्य की अवधारणा से जोड़ते हुए गोस्वामी तुलसीदास की पंक्तियों ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना॥’ का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इसका आशय ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें कोई गरीब, दुखी, दीन-हीन या कमजोर न हो। हर व्यक्ति स्वस्थ और समर्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सके। इसी सोच के साथ केंद्र और प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत कर रही है।

70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर हालत में थे। बच्चों के लिए पेयजल, शौचालय और हॉट-कुक्ड मील जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।

सरकार बनने के बाद आंगनवाड़ी केंद्रों की समीक्षा कराई गई तो पोषाहार आपूर्ति में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पोषाहार आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था में एक शराब माफिया से जुड़े व्यक्ति की भूमिका सामने आने के बाद गुणवत्ता की जांच कराई गई और पूरी व्यवस्था में बदलाव किया गया।

उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया गया है। नए मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एक केंद्र के निर्माण या रिनोवेशन पर करीब 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं।

इन केंद्रों में बाउंड्रीवॉल, बच्चों के लिए शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है।

1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र, 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रही सेवा

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में करीब 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं और 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

हर माह करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। करीब 35.46 लाख बच्चों को हॉट-कुक्ड मील दिया जा रहा है, जबकि लगभग 46 लाख बच्चों के वजन, स्टंटिंग और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

‘मेरी आंगनवाड़ी-मेरी जिम्मेदारी’ बनी पोषण माह की थीम

इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘मेरी आंगनवाड़ी-मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, ग्राम पंचायत और गांव के नागरिकों को भी इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।

पोषण माह के दौरान पांच प्रमुख विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है—आहार विविधता एवं पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं हॉट-कुक्ड मील, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, बाल शिक्षा और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना।

सीएम योगी ने कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित एवं विविध आहार जरूरी है। भोजन में अत्यधिक नमक और मिठास से बचना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केवल मूंग की दाल की खिचड़ी देने के बजाय उसमें गाजर और अन्य सब्जियां शामिल करने से भोजन का स्वाद, रंग और पोषण बेहतर किया जा सकता है।

टेक-होम राशन में GPS और QR कोड से निगरानी

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार की नवीन पोषण गाइडलाइन के अनुरूप प्रदेश में रेसिपी आधारित अनुपूरक पोषाहार लागू किया गया है। टेक-होम राशन (THR) व्यवस्था को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाया गया है।

प्रदेश में 204 टीएचआर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनके संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस व्यवस्था से 20 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं।

पोषाहार के परिवहन से लेकर आंगनवाड़ी केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया में GPS ट्रैकिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेट पर QR कोड लगाया गया है, जिससे उसकी डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित की जा सके।

आंगनवाड़ी बनी प्रारंभिक शिक्षा की पहली पाठशाला

सीएम योगी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र अब केवल पोषण वितरण के केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और सर्वांगीण विकास की पहली पाठशाला बन रहे हैं।

बाल वाटिकाओं में बच्चों को खेल-खेल में अक्षर और अंकों का ज्ञान दिया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की उम्र और रुचि के अनुसार गतिविधियों के माध्यम से उन्हें सीखने का अवसर दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कानपुर के एक आंगनवाड़ी केंद्र का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां बच्चों को गीत और खेल के जरिए संख्या ज्ञान कराया जा रहा था। एक बच्ची से पूछने पर उसने तत्काल गीत के माध्यम से संख्या बताई। सीएम ने कहा कि इससे पता चलता है कि खेल-खेल में बच्चे कितनी आसानी से सीख सकते हैं।

1.60 करोड़ बच्चों को हर साल यूनिफॉर्म, बैग और किताबें

मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में दी जा रही सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और बेहतर वातावरण देना है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 1.60 करोड़ बच्चों को हर वर्ष दो-दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब बाल वाटिका में आने वाले बच्चों के लिए भी दो-दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था अनिवार्य की जा रही है।

ऑपरेशन कायाकल्प से बदली स्कूलों की तस्वीर

सीएम योगी ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से 1.36 लाख विद्यालयों को बेहतर भवन और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। स्कूलों में पेयजल, बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय और बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बड़ी संख्या में बच्चे कक्षा तीन से सात के बीच स्कूल छोड़ देते थे। अध्ययन में सामने आया कि भोजन, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी के कारण खासकर बेटियां पढ़ाई छोड़ रही थीं। इन सुविधाओं में सुधार के बाद ड्रॉपआउट की स्थिति में बदलाव आया है।

प्रोजेक्ट अलंकार से 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार

माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोजेक्ट अलंकार के तहत करीब 40 वर्ष पुराने सरकारी और अशासकीय सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि करीब 2100 इंटर कॉलेजों को धनराशि उपलब्ध कराकर स्मार्ट लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास और बेहतर फर्नीचर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। अटल टिंकरिंग लैब और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी व्यवस्थाओं से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है।

आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय 12 हजार रुपये

मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों के स्वस्थ और सशक्त बचपन के निर्माण में उनकी जिम्मेदारी सबसे अहम है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को करीब तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था। वर्तमान सरकार ने इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया है। सहायिकाओं का मानदेय भी बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है।

इसके अलावा आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया गया है। करीब 1.56 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

‘कुशल युवा ही भारत को नेतृत्व देगा’

सीएम योगी ने कहा कि सक्षम विद्यार्थी आगे चलकर कुशल युवा बनेगा और यही कुशल युवा आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला रखेगा। वही देश को नेतृत्व देगा और विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएगा।

उन्होंने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर किया गया निवेश वास्तव में देश के भविष्य में निवेश है। आंगनवाड़ी से शुरू होने वाली शिक्षा की यात्रा निपुण भारत, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और कौशल विकास तक जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव-गलियों से ही विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार होगी। आंगनवाड़ी केंद्र और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय राष्ट्र निर्माण के शुरुआती केंद्र हैं।

काशी की पुरातन पहचान के साथ आधुनिक विकास

मुख्यमंत्री ने वाराणसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर्मभूमि बताते हुए कहा कि काशी बाबा विश्वनाथ की पावन धरती होने के साथ सनातन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने काशी की पुरातन पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे नए कलेवर और नई पहचान से जोड़ा है। आज काशी नई आभा और नई काया के साथ पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। परंपरा और आधुनिकता का यह समन्वय पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों में भी दिखाई देता है।

कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य, मंत्री अनिल राजभर, रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, हंसराज विश्वकर्मा समेत विभागीय अधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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