नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान के भीतर पुलिसकर्मियों के पहुंचने और तीन नेताओं को हिरासत में लेने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर चर्चा में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंची उड़ान से ही हिरासत में लिया गया। तीनों नेता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली आए थे।
घटना के सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मी विमान के गलियारे में दिखाई देते हैं। अभिजीत दीपके ने कार्रवाई का वीडियो साझा करते हुए पुलिस के विमान के भीतर पहुंचने पर सवाल उठाए। इस कार्रवाई ने विमान में पुलिस की पहुंच, यात्रियों की सुरक्षा और हिरासत की प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है।
विमान को दूसरे स्थान पर ले जाने के बाद हुई कार्रवाई
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई से आई एयर इंडिया की उड़ान एआइ 2428 शनिवार सुबह दिल्ली पहुंची। विमान को सामान्य पार्किंग स्थान के बजाय हवाई अड्डे के एक दूरस्थ बे की ओर ले जाया गया। इसके बाद पुलिसकर्मी विमान में दाखिल हुए और तीनों नेताओं को हिरासत में ले लिया।
इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठे कि पुलिस को विमान के भीतर प्रवेश की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत मिली और हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था में शामिल एजेंसियों के बीच किस तरह समन्वय किया गया। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि विमानन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ। इसके लिए संबंधित एजेंसियों का आधिकारिक पक्ष और कार्रवाई की परिस्थितियां स्पष्ट होना जरूरी है।
प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर पुलिस की कार्रवाई
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे थे। पुलिस ने निषेधाज्ञा और कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की।
रिपोर्टों के अनुसार, तीनों नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धाराओं 126 और 170 के तहत एहतियाती हिरासत में रखा गया। यह कार्रवाई औपचारिक गिरफ्तारी से अलग है। उनकी हिरासत की अवधि और आगे की प्रक्रिया को लेकर नवीनतम आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
सफदरजंग फ्लाईओवर से कनॉट प्लेस तक अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन
शनिवार को जंतर-मंतर तक पहुंचने के रास्तों पर बैरिकेडिंग और भारी पुलिस तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों के छोटे-छोटे समूह राजधानी के कई स्थानों पर नजर आए। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दिल्ली हाट, सफदरजंग फ्लाईओवर, कनॉट प्लेस के आसपास और राजघाट जैसे स्थानों पर अचानक हुए विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख है। पुलिस ने इन समूहों को भी हटाया और कई लोगों को हिरासत में लिया।
इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं। अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या अलग बताई गई है, इसलिए हिरासत में लिए गए लोगों का अंतिम और आधिकारिक आंकड़ा स्पष्ट नहीं है।
आज फिर जंतर-मंतर कूच का आह्वान
शनिवार की कार्रवाई के बाद CJP ने रविवार, 11 अक्टूबर को सुबह 10 बजे फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने समर्थकों से जुटने की अपील की। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने रविवार को भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखने की तैयारी की है। रिपोर्ट में करीब 30 हजार पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियों की तैनाती का उल्लेख है।
प्रदर्शन को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात और सार्वजनिक आवाजाही पर असर पड़ने की आशंका के बीच प्रशासन की नजर संवेदनशील इलाकों पर है। आज के प्रदर्शन में कितने लोग पहुंचते हैं और पुलिस क्या कदम उठाती है, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
विमानन सुरक्षा और पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
विमान के भीतर हुई कार्रवाई को लेकर तीन अहम सवाल चर्चा में हैं। पहला, पुलिस को विमान में प्रवेश की अनुमति किस प्राधिकरण और प्रक्रिया के तहत मिली? दूसरा, क्या विमानन सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों और एयरलाइन के साथ आवश्यक समन्वय किया गया था? तीसरा, क्या यात्रियों की सुरक्षा और सामान्य आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सावधानियां अपनाई गईं?
इन सवालों का जवाब संबंधित पुलिस अधिकारियों, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ), हवाई अड्डा संचालक और एयरलाइन के आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही मिल सकेगा। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इस कार्रवाई को विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन घोषित करना उचित नहीं होगा।
यह घटनाक्रम अब केवल तीन नेताओं की हिरासत तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर पुलिस कानून-व्यवस्था और निषेधाज्ञा के पालन की बात कर रही है, तो दूसरी ओर प्रदर्शनकारी अपने विरोध के अधिकार और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। रविवार को प्रस्तावित प्रदर्शन और संबंधित एजेंसियों के आधिकारिक बयान से मामले की अगली तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।