अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृतियों के बीच अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा एक नया धार्मिक आयोजन अयोध्या में चर्चा का विषय बना है। ब्रजभूमि से आए संतों और श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए रजत शिला का पूजन कराया। शनिवार को अयोध्या पहुंचे भक्तों के दल ने सरयू तट पर विधिवत पूजन-अर्चन के बाद रजत शिला को हनुमानगढ़ी पहुंचाया और फिर रामलला के दर्शन कराते हुए मणिराम छावनी में महंत नृत्यगोपाल दास के हाथों इसका सांकेतिक पूजन कराया।
इस आयोजन ने राम मंदिर निर्माण से पहले के उस दौर की यादें ताजा कर दीं, जब दिगंबर अखाड़ा के तत्कालीन महंत और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संतों में शामिल महंत रामचंद्र दास परमहंस ने राम मंदिर के लिए शिला पूजन और शिला दान की परंपरा को आगे बढ़ाया था।
हालांकि, दोनों आयोजनों की परिस्थितियां और उद्देश्य अलग हैं। राम मंदिर आंदोलन के समय महंत रामचंद्र दास परमहंस ने स्वयं अपनी अंतिम इच्छा के रूप में शिला दान की बात कही थी, जबकि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए शिला पूजन का आह्वान ब्रजभूमि के संतों की ओर से किया गया है।
सरयू तट पर हुआ रजत शिला का पूजन
ब्रजभूमि से हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी के नेतृत्व में श्रद्धालुओं का दल शनिवार को अयोध्या पहुंचा। सबसे पहले रजत शिला को सरयू तट ले जाया गया। यहां धार्मिक विधि-विधान के साथ शिला का पूजन-अर्चन किया गया। पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अपने संकल्प को लेकर धार्मिक अनुष्ठान किया। इसके बाद रजत शिला को अयोध्या के प्रमुख धार्मिक केंद्र हनुमानगढ़ी ले जाया गया।
हनुमानगढ़ी में हनुमंत लला का लिया आशीर्वाद
सरयू पूजन के बाद रजत शिला को हनुमानगढ़ी ले जाया गया। यहां श्रद्धालुओं ने हनुमान जी के दर्शन किए और रजत शिला को अर्पित कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद शिला को श्रीराम जन्मभूमि परिसर की ओर ले जाया गया। रामलला के दर्शन के बाद इसे मणिराम छावनी ले जाया गया, जहां श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के हाथों इसका सांकेतिक पूजन कराया गया। मणिराम छावनी के संत महंत नृत्यगोपाल दास के निजी सहायक जानकी दास ने भी इस पूजन की पुष्टि की है।
राम मंदिर आंदोलन की पुरानी यादों से जुड़ा आयोजन
अयोध्या में हुए इस शिलापूजन को राम मंदिर आंदोलन की पुरानी परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। राम मंदिर निर्माण से पहले महंत रामचंद्र दास परमहंस समेत कई संतों ने मंदिर निर्माण के लिए देशभर में धार्मिक और जनजागरण अभियान चलाया था। इसी वजह से श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए अयोध्या में रजत शिला पूजन का कार्यक्रम धार्मिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टियों से चर्चा में है। हालांकि आयोजकों की ओर से इसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े संकल्प के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
9 अगस्त को ब्रजभूमि के संतों ने किया था शिला पूजन का ऐलान
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए शिला पूजन का ऐलान ब्रजभूमि के संतों की ओर से नौ अगस्त को किया गया था। इसके बाद रजत शिला को अयोध्या लाकर धार्मिक अनुष्ठान कराने की तैयारी की गई। शनिवार को यह शिला सरयू तट से लेकर हनुमानगढ़ी और फिर श्रीराम जन्मभूमि की चौखट तक पहुंची। इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया।
अयोध्या से मथुरा तक धार्मिक गतिविधियों पर नजर
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या देश-दुनिया में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। ऐसे में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े इस आयोजन ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। रजत शिला पूजन के बाद अब इसकी चर्चा ब्रजभूमि और अयोध्या दोनों क्षेत्रों में हो रही है। आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े उनके धार्मिक संकल्प का प्रतीक है। फिलहाल अयोध्या में हुए इस शिलापूजन को लेकर श्रद्धालुओं और संत समाज के बीच चर्चा तेज है। आने वाले दिनों में इस अभियान से जुड़े कार्यक्रमों पर भी लोगों की नजर रहेगी।