अयोध्या। रामनगरी में होने वाले दसवें दीपोत्सव-2026 को भव्य और सफल बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने दीपोत्सव की व्यवस्थाओं को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में कौटिल्य प्रशासनिक भवन स्थित भूतल सभागार में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में पहली महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में विश्वविद्यालय से संबद्ध नजदीकी महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्य तथा उनके प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पावन धरा पर दीपोत्सव का आयोजन सभी के लिए पुनीत सेवा का अवसर है। इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने में टीमवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण है और प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बार तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए समयबद्ध और त्रुटिरहित योजना के साथ कार्य किया जाएगा, ताकि दीपोत्सव में विश्वविद्यालय की व्यवस्थाएं बेहतर हों और नया कीर्तिमान स्थापित करने में योगदान दिया जा सके।
34 हजार से अधिक स्वयंसेवकों का बनेगा ऑनलाइन डाटाबेस
स्थानीय महाविद्यालयों के दीपोत्सव संयोजकों को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए 34 हजार से अधिक स्वयंसेवकों का ऑनलाइन डाटाबेस निर्धारित समयसीमा में तैयार किया जाएगा। उन्होंने नोडल अधिकारी को स्वयंसेवकों की पंजीयन सूची शीघ्र अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि दीपोत्सव के दौरान सभी घाटों को अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक घाट की व्यवस्था के लिए संबंधित महाविद्यालयों और विद्यालयों के प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
घाटों पर पेयजल और स्वच्छता पर रहेगा विशेष जोर
दीपोत्सव में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए घाटों पर मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी निर्देश दिए गए। कुलपति ने घाटों पर पर्याप्त पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
इसके लिए घाटों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन रखने और नियमित सफाई कराने पर जोर दिया गया। स्वयंसेवकों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए वाहनों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
कुलपति ने कहा कि स्वयंसेवकों को उनकी जिम्मेदारियों और आयोजन से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी पहले से उपलब्ध कराई जाए, ताकि दीपोत्सव के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति न बने।
छोटे बच्चों को स्वयंसेवक नहीं बनाने के निर्देश
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुलपति ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला प्रशासन के सहयोग और राज्य सरकार के निर्देशों के तहत छोटे बच्चों को किसी भी परिस्थिति में स्वयंसेवक नहीं बनाया जाएगा।
स्वयंसेवकों के चयन और पंजीयन के दौरान निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियां तय करने और उन्हें आयोजन से पहले आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
टीमवर्क से सफल होगा दीपोत्सव आयोजन
बैठक में कुलपति ने कहा कि दीपोत्सव जैसे बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों, विद्यालयों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सभी संबंधित संस्थानों को अपनी जिम्मेदारियों का समय से निर्वहन करने और व्यवस्थाओं में तकनीक का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
गौरतलब है कि अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत 2017 में हुई थी और इसके बाद आयोजन लगातार बड़े स्तर पर होता गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक प्रकाशनों में भी दीपोत्सव के दौरान बनाए गए विभिन्न दीप प्रज्ज्वलन रिकॉर्ड और बढ़ती जनभागीदारी का उल्लेख मिलता है।
ये अधिकारी और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में दीपोत्सव के नोडल अधिकारी प्रो. एसएस मिश्र, साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी सहित राजकरण वैदिक पाठशाला इंटर कॉलेज, साहबदीन सीताराम इंटर कॉलेज, मनोहर लाल इंटर कॉलेज, आर्य कन्या इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, शिव सावित्री महाविद्यालय, कैनोसा इंटर कॉलेज, ग्रामर इंटरनेशनल स्कूल, एमआर जयपुरिया स्कूल, बीएस गर्ल्स डिग्री कॉलेज और भगवान आशा बख्श सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।