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अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फैसला: एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा होंगे CEO, 3 नए न्यासी नियुक्त, ₹1,882 करोड़ की उपलब्ध राशि

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास की बुधवार, 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में हुई महत्वपूर्ण बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए। न्यासी मंडल ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही ट्रस्ट में रिक्त तीन पदों पर महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नया न्यासी बनाया गया है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्षिक लेखों को भी मंजूरी दी गई।

ऑपरेशन सिंदूर में निभा चुके हैं अहम भूमिका

राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO के रूप में नियुक्त एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक का लंबा सैन्य और नेतृत्व अनुभव रखते हैं। वह 1986 में भारतीय वायुसेना में कमीशन हुए थे और फाइटर पायलट तथा टेस्ट पायलट के तौर पर सेवाएं दीं।

उन्होंने वायुसेना में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व प्रमुख रहे। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल के साथ-साथ अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें 3,000 से अधिक घंटे की उड़ान का अनुभव है। ट्रस्ट के अनुसार, पिछले वर्ष हुए सफल सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ था। वह 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए।

5,500 से अधिक आवेदनों के बाद हुआ चयन

CEO के चयन के लिए गठित समिति की अनुशंसा पर न्यासियों ने जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई। चयन समिति ने कम समय में करीब साढ़े पांच हजार आवेदनों की जांच की और सैकड़ों उम्मीदवारों के साक्षात्कार के बाद अपनी अनुशंसा तैयार की। ट्रस्ट ने चयन समिति के सदस्य सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी, सुरेश हावड़े और समिति के सचिव समीर पंडा के प्रति आभार व्यक्त किया।

ट्रस्ट में तीन नए न्यासी

बैठक में न्यास के तीन रिक्त पदों को भरने का भी निर्णय लिया गया। इसके तहत महेश भागचंदका,मदन मोहन पांडे,डॉ. निर्मला यादव को नया न्यासी नियुक्त किया गया है।

कौन हैं महेश भागचंदका?

68 वर्षीय महेश भागचंदका स्नातक हैं और नई दिल्ली में व्यवसाय एवं समाजसेवा से जुड़े हैं। वह ‘हिन्दुत्व के पुरोधा’ पुस्तक के लेखक हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमि-पूजन और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रमों में उन्होंने यजमान के रूप में अनुष्ठानों में सहभागिता की थी। वह श्रीराम वन गमन यात्रा से जुड़े 292 पवित्र तीर्थस्थलों पर श्रीराम स्तंभ की स्थापना से भी जुड़े रहे हैं। वह वर्ल्ड हिंदू इकनॉमिक फोरम की कार्यकारिणी के सदस्य हैं।

राम मंदिर केस की पैरवी से जुड़े रहे मदन मोहन पांडे

74 वर्षीय मदन मोहन पांडे विधि स्नातक और अधिवक्ता हैं। उन्होंने 1990 से 2019 तक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मामले में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में श्रीरामलला विराजमान तथा महंत श्री रामचंद्र परमहंस दास की ओर से पैरवी की। वह उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में छह वर्ष तक दायित्व निभा चुके हैं। इसके अलावा वह श्री हरि सत्संग समिति के उपाध्यक्ष और अयोध्या में कथाकार योजना प्रशिक्षण केंद्र के पालक भी हैं।

डॉ. निर्मला यादव भी बनीं न्यासी

शिकोहाबाद की रहने वाली 66 वर्षीय डॉ. निर्मला यादव हिन्दी एवं संस्कृत में परास्नातक तथा पीएचडी हैं। उन्होंने करीब 19 वर्ष तक महाविद्यालय की प्राचार्या के रूप में जिम्मेदारी संभाली और अब सेवानिवृत्त हैं। उन्हें पीएचडी थीसिस तथा एमए की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का अनुभव है। वह 15 वर्ष तक विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्य भी रही हैं।

अब स्वामी गोविंददेव गिरि संभालेंगे महामंत्री की जिम्मेदारी

न्यासी मंडल ने पदाधिकारियों के दायित्वों में भी बदलाव किया है। अब स्वामी गोविंददेव गिरि महामंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि नवनियुक्त न्यासी महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष का दायित्व संभालेंगे। न्यास ने पिछले दो महीनों की चुनौतीपूर्ण अवधि में महामंत्री पद का दायित्व सफलतापूर्वक संभालने के लिए कृष्ण मोहन जी की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

चढ़ावे की नगदी गिनने में कम होगा मानवीय हस्तक्षेप

बैठक में राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की नगद राशि की गणना प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने पर भी चर्चा हुई। मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए दो बैंकों और आईआईटी की ओर से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ट्रस्ट इन प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। माना जा रहा है कि तकनीक के इस्तेमाल से नगद चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

वित्तीय अनियमितताओं की जांच पर भी चर्चा

न्यासी मंडल ने कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित मामले में उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका और विशेष जांच दल (SIT) की जांच की प्रगति पर भी चर्चा की। ट्रस्ट ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने जांच के क्षेत्र को समय-काल और विषय दोनों के लिहाज से विस्तृत किया है। न्यास ने न्यायालय के इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सच्चाई सामने आने और लोगों के मन में पैदा हुए भ्रम को दूर करने में मदद मिलेगी।

राम मंदिर ट्रस्ट के पास कितने पैसे?

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्षिक लेखे प्रस्तुत किए गए। ट्रस्ट के अनुसार इस अवधि में कुल 237 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि 91 करोड़ रुपये का व्यय रहा।

इसके अतिरिक्त मंदिर निर्माण आदि कार्यों पर 425 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय हुआ। वित्तीय वर्ष के अंत यानी 31 मार्च 2026 को न्यास के पास कुल 1,882 करोड़ रुपये की उपलब्ध राशि थी। न्यासी मंडल ने वार्षिक लेखों को अनुमोदित कर दिया।

एक बैठक में कई बड़े फैसले

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO की नियुक्ति, तीन नए न्यासियों का चयन, पदाधिकारियों के दायित्वों में बदलाव, वित्तीय लेखों की मंजूरी, चढ़ावे की नगदी की तक नीकी गणना और SIT जांच जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिए गए।

 

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