लखनऊ। प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ऊर्जा विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ और उनकी टहनियां बिजली लाइनों पर गिरने से फॉल्ट और ब्रेकडाउन की घटनाएं बढ़ी हैं। लखनऊ कंट्रोल रूम के अनुसार 11 केवी के 716 फीडर और 33 केवी के 173 उपकेंद्रों के बंद होने की सूचना मिली है। इनकी लगातार निगरानी करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम किया जा रहा है।
प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने लेसा समेत सभी वितरण निगमों के अधिकारियों को बिजली व्यवस्था की लगातार निगरानी करने और स्थानीय फॉल्ट को कम से कम समय में ठीक कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी बारिश के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित हो, वहां सक्रिय मरम्मत दल तत्काल मौके पर पहुंचकर व्यवस्था बहाल करें।
स्थानीय फॉल्ट पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश
रणवीर प्रसाद ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बारिश के कारण होने वाले स्थानीय फॉल्ट की जानकारी उपभोक्ताओं तक संचार माध्यमों के जरिए पहुंचाई जाए। इससे उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति और उसे बहाल करने की प्रक्रिया की जानकारी मिल सकेगी।
उन्होंने विद्युत दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश भी दिए हैं। अनुरक्षण और मरम्मत का काम कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के बाद ही कराया जाएगा।
शक्ति भवन में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम
बिजली व्यवस्था की निगरानी के लिए शक्ति भवन में 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय किया गया है। यहां छह अधीक्षण अभियंताओं की तैनाती की गई है। अधिकारी विभिन्न वितरण निगमों के कंट्रोल रूम के साथ समन्वय कर फॉल्ट, मरम्मत दल, उपलब्ध सामग्री और लंबे समय से बाधित बिजली आपूर्ति की स्थिति की जानकारी ले रहे हैं।
विशेष रूप से 12 घंटे से अधिक समय से बाधित आपूर्ति वाले क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई गई है। संबंधित अधिकारियों को पर्याप्त संख्या में मरम्मत दल और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराकर जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल कराने के निर्देश दिए गए हैं।
पेड़ और टहनियां गिरने से बढ़े ब्रेकडाउन
ऊर्जा विभाग के अनुसार अप्रत्याशित भारी बारिश के चलते प्रदेश में ब्रेकडाउन की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। इनमें बड़ी संख्या उन फॉल्ट की है, जो पेड़ या उनकी टहनियां बिजली लाइनों पर गिरने के कारण हुए हैं। ऐसे स्थानों पर पहले विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसके बाद ही मरम्मत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश और तेज हवा के दौरान बिजली लाइनों के आसपास किसी तरह का जोखिम न लेने की भी अपील की गई है। विद्युत कर्मियों को सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए ही लाइन पर काम करने को कहा गया है।
बारिश से बिजली की मांग में बड़ी गिरावट
लगातार बारिश के कारण प्रदेश में बिजली की मांग में भी उल्लेखनीय कमी आई है। विभाग के अनुसार बिजली की मांग करीब 28 हजार मेगावाट से घटकर 16 हजार मेगावाट से नीचे आ गई है। बारिश के चलते तापमान और उमस कम होने से पंखे, कूलर और वातानुकूलन उपकरणों के इस्तेमाल में कमी इसका एक प्रमुख कारण बताया गया है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार मांग में कमी के कारण उपलब्ध बिजली का प्रबंधन आसान हुआ है और अतिरिक्त बिजली को पावर एक्सचेंज में बेचने की स्थिति बनी है। हालिया रिपोर्ट में भी बारिश के दौरान राज्य की अधिकतम बिजली मांग में एक दिन में 6197 मेगावाट की गिरावट दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
1912 पर दर्ज कराएं बिजली संबंधी शिकायत
पावर कारपोरेशन ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि बिजली आपूर्ति से जुड़ी किसी भी समस्या, फॉल्ट या विद्युत दुर्घटना की सूचना तत्काल 1912 पर दें। आधिकारिक बिजली हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचती है और उसके निस्तारण की निगरानी भी की जाती है।
कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर
शक्ति भवन: 0522-2288737, 0522-2288738
– टोल फ्री: 1912
>- मध्यांचल: 0522-4950397
>- केस्को: 8189045757
>- पूर्वांचल: 0542-2300137
>- दक्षिणांचल: 9412719627
>- पश्चिमांचल: 9412749313