नई दिल्ली। भारत में सड़क दुर्घटनाएं लगातार गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बनी हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ग्लोबल हेल्थ एस्टिमेट्स के अनुसार सड़क हादसे भारत में दोनों लिंगों को मिलाकर मृत्यु का 10वां प्रमुख कारण हैं, जबकि पुरुषों में यह आठवें स्थान पर है। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश में सड़क हादसों में प्रतिदिन करीब 500 लोगों की जान जा रही है।
WHO के अनुसार सड़क हादसों का जोखिम केवल वाहन चलाने वाले की गलती तक सीमित नहीं है। तेज रफ्तार, शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग, असुरक्षित सड़क ढांचा और यातायात नियमों का प्रभावी तरीके से पालन न कराया जाना दुर्घटनाओं के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
तेज रफ्तार सबसे बड़ा खतरा
भारत में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में तेज रफ्तार की भूमिका सबसे गंभीर है। भारत सरकार के सड़क दुर्घटना संबंधी आंकड़ों के अनुसार 2022 में 1,68,491 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई थी। इनमें 1,19,904 मौतें तेज रफ्तार से जुड़े हादसों में हुईं। इसी अवधि में गलत दिशा में वाहन चलाने से 9,094, शराब या नशीले पदार्थों के सेवन से 4,201 और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल से 3,395 मौतें दर्ज की गईं।
NCRB के 2024 के आंकड़ों के अनुसार भारत में सड़क, रेल और अन्य यातायात दुर्घटनाओं को मिलाकर करीब 1.99 लाख लोगों की मौत हुई। इनमें लगभग 1.75 लाख मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुईं। सड़क हादसों में मौतों के कारणों में तेज रफ्तार सबसे ऊपर रही, जिसके बाद लापरवाह या खतरनाक ड्राइविंग का स्थान रहा।
मोबाइल फोन भी बढ़ा रहा दुर्घटना का खतरा
WHO के मुताबिक वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल चालक का ध्यान भटकाता है और प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय बढ़ा देता है। मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले चालकों के दुर्घटना का शिकार होने की संभावना उन चालकों की तुलना में करीब चार गुना अधिक होती है, जो वाहन चलाते समय फोन का इस्तेमाल नहीं करते।
हेलमेट और सीट बेल्ट से घट सकता है मौत का खतरा
WHO के अनुसार सही तरीके से हेलमेट पहनने से सड़क हादसे में मौत का जोखिम छह गुना से अधिक कम हो सकता है और मस्तिष्क की चोट का खतरा 74 प्रतिशत तक घट सकता है। वहीं सीट बेल्ट वाहन सवार की मृत्यु के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम कर सकती है। बच्चों के लिए उचित सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल भी जान बचाने में महत्वपूर्ण है।
सिर्फ चालक नहीं, सड़क व्यवस्था भी जिम्मेदार
WHO ने सड़क सुरक्षा के लिए केवल वाहन चालकों पर निर्भर रहने के बजाय सुरक्षित सड़क, सुरक्षित गति, सुरक्षित वाहन और सुरक्षित सड़क उपयोगकर्ताओं पर आधारित व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया है। पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए फुटपाथ, सुरक्षित क्रॉसिंग, साइकिल लेन और यातायात नियंत्रित करने वाली व्यवस्थाएं दुर्घटनाओं को कम करने में मदद कर सकती हैं।
भारत सरकार भी सड़क सुरक्षा के लिए शिक्षा, सड़क एवं वाहन इंजीनियरिंग, यातायात नियमों के प्रवर्तन और दुर्घटना के बाद आपात चिकित्सा सहायता पर आधारित चार-स्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2022 में दर्ज सड़क दुर्घटनाओं में करीब 78 प्रतिशत दुर्घटनाओं के पीछे चालक की गलती बताई गई थी।
सड़क सुरक्षा में छोटी सावधानी, बड़ी जिंदगी बचा सकती है
WHO का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए तेज रफ्तार पर नियंत्रण, शराब पीकर वाहन चलाने पर रोक, हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य इस्तेमाल, मोबाइल से दूरी और यातायात नियमों का प्रभावी पालन जरूरी है। सड़क सुरक्षा को केवल चालक की जिम्मेदारी न मानकर सरकार, पुलिस, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य सेवाओं और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी के रूप में देखने की जरूरत है।