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तिब्बत में बैरियर झील से मंडराया बाढ़ का खतरा, शी जिनपिंग ने बुलाई आपात बैठक

बीजिंग। नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब एक नई चुनौती सामने आ गई है। चीन के शिज़ांग (तिब्बत) स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरॉन्ग काउंटी में ग्लेशियर टूटने और मलबे के बहाव से बनी बैरियर झील को लेकर प्रशासन अलर्ट पर है। झील में लगातार पानी जमा होने से निचले इलाकों में संभावित बाढ़ के खतरे का आकलन किया जा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था, हालांकि बाद में जोखिम का आकलन करने के बाद अभियान फिर शुरू कर दिया गया।

इसी बीच चीन के राष्ट्रपति और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी जिनपिंग ने शुक्रवार को केंद्रीय राजनीतिक ब्यूरो की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ग्यिरॉन्ग काउंटी में हुई भीषण मडस्लाइड के बाद राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की गई और आगे की तैयारियों को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए।

बैरियर झील पर विशेषज्ञों की नजर

भूस्खलन और ग्लेशियर से आए मलबे ने नदी के प्रवाह को बाधित कर बैरियर झील का निर्माण कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक झील में पानी की मात्रा 25 लाख घन मीटर से अधिक हो चुकी है और बारिश जारी रहने पर इसमें और पानी आने की आशंका है। यही वजह है कि विशेषज्ञ और चीनी प्रशासन झील की स्थिरता पर लगातार नजर रख रहे हैं। चीन ने झील की स्थिति का आकलन करने के लिए हवाई सर्वेक्षण और तकनीकी मॉनिटरिंग का सहारा लिया। आकलन के बाद अधिकारियों ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने योग्य माना और बचाव अभियान दोबारा शुरू किया। हालांकि, अस्थिर पहाड़ी भूभाग और लगातार बारिश के कारण खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

ग्यिरॉन्ग में तबाही के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

26 अगस्त को नेपाल की ओर से आए भीषण मलबे और बाढ़ ने चीन-नेपाल सीमा के ग्यिरॉन्ग क्षेत्र को भी प्रभावित किया। इलाके में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। चीन की ओर से राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया गया है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत की ओर आपदा में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

शी जिनपिंग ने दिए निगरानी और बचाव तेज करने के निर्देश

शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाली बैठक में बचाव अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के साथ-साथ ग्लेशियर झीलों, भूस्खलन और बैरियर झीलों की निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया गया। संभावित द्वितीयक आपदाओं से निपटने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। चीन के प्रधानमंत्री ली च्यांग भी प्रभावित ग्यिरॉन्ग क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। इससे संकेत मिलता है कि बीजिंग इस आपदा को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

नेपाल में भी बाढ़ से भारी तबाही

इस आपदा का सबसे बड़ा असर नेपाल में देखने को मिला है। नेपाल में बाढ़ और मलबे के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। दोनों देशों की एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं।बैरियर झील से उत्पन्न संभावित खतरे के कारण नेपाल-तिब्बत सीमा के निचले इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। फिलहाल विशेषज्ञ झील के जलस्तर और आसपास के भूभाग की स्थिरता पर नजर बनाए हुए हैं।

खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं

विशेषज्ञों का आकलन है कि लगातार बारिश, अस्थिर पहाड़ी ढलान और ग्लेशियर से जुड़े बदलाव स्थिति को दोबारा गंभीर बना सकते हैं। ऐसे में बचाव एजेंसियां किसी भी नए जलप्रवाह, भूस्खलन या झील के अचानक टूटने की आशंका को लेकर सतर्क हैं। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं और बैरियर झील की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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