अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने तेज कर दी है। जांच के तहत चढ़ावे से संबंधित बैंक अभिलेखों, जमा प्रक्रिया और बहुमूल्य धातुओं की इन्वेंटरी का गहन सत्यापन किया जा रहा है। ट्रस्ट के पदाधिकारी भी बैंक अधिकारियों के साथ रिकॉर्ड का मिलान करने में जुटे हैं। मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन अपने वित्तीय सहयोगियों के साथ बैंक पहुंचे, जहां उन्होंने चढ़ावे से जुड़े दस्तावेज, जमा रजिस्टर और बहुमूल्य धातुओं के रिकॉर्ड का मिलान किया। सूत्रों के अनुसार एसआईटी पूर्व में उपलब्ध दस्तावेजों और रिपोर्ट के आधार पर तथ्यों का सत्यापन कर जांच को आगे बढ़ा रही है।
सूत्र बताते हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा पहले गठित एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के पालन में दोनों पक्षों की लापरवाही का उल्लेख किया था। हालांकि उस रिपोर्ट में किसी अधिकारी या व्यक्ति की जवाबदेही तय नहीं की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच में सभी पहलुओं की दोबारा पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों के साथ-साथ बैंक रिकॉर्ड, जमा प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की भी गहन जांच कर रही हैं। इसके अलावा विभिन्न अवसरों पर मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जा रहा है।
रामनवमी और महाकुंभ के चढ़ावे का हो रहा तुलनात्मक विश्लेषण
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी रामनवमी मेले और महाकुंभ के दौरान प्राप्त चढ़ावे के बैंक रिकॉर्ड का तुलनात्मक परीक्षण कर रही है। जांच अधिकारी दोनों अवधियों के जमा अभिलेखों का मिलान कर संभावित अनियमितताओं की पड़ताल में जुटे हैं।
सुभाष श्रीवास्तव की अर्जी पर अब आज को सुनवाई
चढ़ावा प्रकरण के आरोपी सुभाष श्रीवास्तव द्वारा बंद पेंशन खाते को लेकर दायर प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। स्पेशल जज (एंटी करप्शन) रजत वर्मा के अवकाश पर होने के कारण अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।
चंपत राय का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह संतों से मुलाकात के दौरान मीडिया कैमरे को हटाने का इशारा करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।