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झांसी का 140 साल पुराना परीछा बांध बना वैश्विक विरासत, ICID ने WHIS के लिए चुना, अक्टूबर में फ्रांस में मिलेगा सम्मान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक जल संरचनाओं को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में योगी सरकार को बड़ी उपलब्धि मिली है। झांसी का करीब 140 साल पुराना परीछा बांध अब विश्व विरासत सिंचाई संरचनाओं की सूची में शामिल हो गया है। इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (ICID) ने परीछा बांध को वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर्स (WHIS) के रूप में मान्यता दी है। परीछा बांध को WHIS Award-26 से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार फ्रांस के मार्सेई में अक्टूबर में आयोजित होने वाली 26वीं ICID इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग के दौरान प्रदान किया जाएगा।

140 साल से बुंदेलखंड की सिंचाई व्यवस्था का आधार

प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग के मुताबिक 13 अगस्त को विभाग को ICID की ओर से इस संबंध में पत्र मिला। इसमें परीछा बांध को WHIS Award-26 के लिए चयनित किए जाने की जानकारी दी गई और फ्रांस में होने वाले कार्यक्रम के लिए विभागीय अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। बेतवा नदी पर बना परीछा बांध करीब 140 वर्षों से बुंदेलखंड की सिंचाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बेतवा नहर प्रणाली का प्रमुख हिस्सा है, जिसके जरिए बुंदेलखंड के अपेक्षाकृत सूखे क्षेत्रों में खेती के लिए पानी पहुंचाया जाता है।

1,174 मीटर लंबा और 16.8 मीटर ऊंचा है बांध

परीछा बांध की लंबाई करीब 1,174 मीटर है, जबकि नदी तल से इसकी ऊंचाई करीब 16.8 मीटर है। बांध में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए 318 स्टील गेट लगाए गए हैं। इन गेटों के जरिए आवश्यकता के अनुसार पानी को रोका और छोड़ा जाता है। समय के साथ बांध की जल भंडारण क्षमता में भी वृद्धि की गई है। पहले इसकी क्षमता करीब 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट थी, जिसे बढ़ाकर करीब 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट किया गया है।

यूपी और मध्य प्रदेश के इलाकों को मिलता है सिंचाई का लाभ

परीछा बांध से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों को सिंचाई का लाभ मिलता है। बुंदेलखंड जैसे पानी की चुनौती वाले क्षेत्र में इस जल संरचना की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। इसके अलावा परीछा बांध से 920 मेगावाट क्षमता वाले थर्मल पावर प्रोजेक्ट को भी पानी की आपूर्ति की जाती है।

1881 में शुरू हुआ था निर्माण

परीछा बांध की कहानी 19वीं सदी से जुड़ी है। वर्ष 1855 में कैप्टन स्ट्रेची ने बुंदेलखंड के लिए नहर प्रणाली विकसित करने का विचार रखा था। इसके बाद क्षेत्र में सर्वेक्षण किया गया। परीछा बांध का निर्माण 1881 में शुरू हुआ और 1886 में यह चालू हुआ। करीब 140 वर्ष बाद भी यह बांध सिंचाई और जल प्रबंधन में अपनी भूमिका निभा रहा है।

बारिश में पर्यटकों को आकर्षित करता है बांध

परीछा बांध केवल सिंचाई व्यवस्था के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह पर्यटन के लिहाज से भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। बारिश के मौसम में जब बांध के गेट खोले जाते हैं तो पानी के तेज प्रवाह का दृश्य देखने के लिए लोग यहां पहुंचते हैं।

सिर्फ बांध नहीं, बुंदेलखंड की जल विरासत का सम्मान

परीछा बांध को WHIS Award-26 के लिए चुना जाना सिर्फ एक पुरानी सिंचाई संरचना को मिला सम्मान नहीं है, बल्कि यह बुंदेलखंड की उस ऐतिहासिक जल प्रबंधन व्यवस्था की वैश्विक पहचान भी है, जिसने दशकों से किसानों और खेती को पानी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योगी सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक जल संरचनाओं के संरक्षण और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने के साथ आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दे रही है। परीछा बांध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली यह मान्यता उत्तर प्रदेश की जल विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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