श्रीनगर। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चुनावों और केंद्र व राज्यों की सरकारों की वैधता पर दिए बयान से पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने असहमति जताई है। अय्यर ने कहा कि वे खरगे के इस आकलन से सहमत नहीं हैं कि निर्वाचित सरकारें अवैध हैं। हालांकि, उन्होंने चुनाव के बाद चुनाव आयोग की ओर से की गई कुछ कार्रवाइयों पर सवाल जरूर उठाए।
श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मणिशंकर अय्यर से खरगे के बयान को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि सरकार अवैध है। उनके मुताबिक संबंधित लोग विधिवत चुनाव जीतकर चुने गए हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद की गई कार्रवाइयों को लेकर संदेह हैं।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अय्यर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी स्वायत्तता को लेकर अलग से सवाल उठाने के बजाय नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार पर भी अपनी असहमति जाहिर की और चुनाव आयुक्तों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। अय्यर का कहना था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है।
खरगे ने चुनाव प्रक्रिया पर जताई थी आपत्ति
मल्लिकार्जुन खरगे ने 3 अक्टूबर को कर्नाटक के कलबुर्गी में कहा था कि देश में मौजूदा व्यवस्था चुनावों की वैधता से जुड़े सवालों के घेरे में है। उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग कर मतपत्र के माध्यम से नए चुनाव कराने की मांग भी की थी। खरगे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी आपत्तियां उठाई थीं।
खरगे के इसी बयान के संदर्भ में अय्यर ने कहा कि वह निर्वाचित प्रतिनिधियों को अवैध मानने के निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं, लेकिन चुनाव के बाद की कुछ कार्रवाइयों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।