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नेपाल बाढ़ का करंट अपडेट: 320 भारतीय अब भी लापता, 85 भारतीय पर्यटक रेस्क्यू, भारत ने भेजी राहत सामग्री

नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल के रसुवा और भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। 29 अगस्त की ताजा स्थिति के मुताबिक, नेपाल में आई आपदा के बाद करीब 320 भारतीय नागरिक अब भी लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। वहीं नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 85 भारतीय पर्यटकों समेत 117 विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में फंसे भारतीयों की तलाश और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए भारत लगातार नेपाली अधिकारियों के संपर्क में है। तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालकर भारत लाया जा चुका है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली पहुंचने के बाद इन तीर्थयात्रियों से मुलाकात भी की।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा बढ़ा, हजारों लोग प्रभावित

भोटेकोशी-त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ और मलबे के बहाव ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में मृतकों की संख्या 500 के पार पहुंच चुकी है, जबकि करीब एक हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और दूसरे बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। नेपाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू अभियान शुरू किया है। हजारों सुरक्षाकर्मी राहत कार्य में लगाए गए हैं और हेलीकॉप्टरों के जरिए दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

भारतीयों की तलाश के लिए भारत ने बढ़ाई मदद

भारत ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए मानवीय सहायता भी भेजी है। 28 अगस्त को भारत ने 10 टन राहत सामग्री की तीसरी खेप नेपाल भेजी, जिसके बाद भेजी गई कुल मानवीय सहायता 57.5 टन हो गई।  MEA की ओर से भारतीय नागरिकों के बारे में लगातार जानकारी जुटाई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार चीन की ओर से फंसे 96 भारतीय नेपाल की तरफ पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय सुरक्षित बताए गए हैं।

फिर बढ़ी बैरियर झील की चिंता

बाढ़ के बाद एक और खतरा सामने आया है। भूस्खलन और ग्लेशियर से बने मलबे के कारण नदी के रास्ते में बनी झीलों के जलस्तर पर निगरानी रखी जा रही है। एक बैरियर झील के बढ़ते आकार को लेकर भी चिंता बनी हुई थी। इसी वजह से कुछ समय के लिए बचाव अभियान को रोकना पड़ा, हालांकि बाद में खतरा नियंत्रित माने जाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन फिर शुरू किया गया।

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