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Nepal PM Balen Shah: UN में बालेन शाह ने भारत का जताया आभार, बोले- मुश्किल वक्त में तुरंत मिली मदद: हिमालय के लिए रखा बड़ा प्रस्ताव

न्यूयॉर्क। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत की मदद के लिए आभार जताया। नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव के लिए भारत और चीन की ओर से दी गई सहायता का उल्लेख करते हुए शाह ने दोनों पड़ोसी देशों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत और चीन ने तत्काल और उदार सहायता उपलब्ध कराई।

‘भारत और चीन ने तुरंत सहायता पहुंचाई’

यूएन में अपने संबोधन की शुरुआत में बालेन शाह ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद मदद के लिए आगे आने वाले देशों और संस्थाओं के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि नेपाल के करीबी पड़ोसी भारत और चीन ने तुरंत सहायता उपलब्ध कराई।

 

शाह ने संयुक्त राष्ट्र, मानवीय संस्थाओं, परोपकारी संगठनों और दुनिया के अन्य लोगों का भी नेपाल के साथ खड़े होने के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग नेपाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

पीएम मोदी से फोन पर हुई थी बात

नेपाल में बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को बालेन शाह से फोन पर बातचीत की थी। पीएम मोदी ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा था कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है।

इसके बाद बालेन शाह ने भी प्रधानमंत्री मोदी के फोन और भारत की सहायता की पेशकश के लिए आभार जताया था। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती का प्रतीक बताया था।

नेपाल की संसद में भी किया था भारत का धन्यवाद

इससे पहले 2 सितंबर को नेपाल की संसद में बालेन शाह ने भारत और चीन की मदद का उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञों ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने में सहायता की। भारतीय विशेषज्ञों के जल्द प्रभावित इलाकों तक पहुंचने का भी उन्होंने जिक्र किया था।

हिमालय के लिए भारत-चीन के साथ नया तंत्र बनाने का प्रस्ताव

यूएन में बालेन शाह ने सिर्फ राहत सहायता की चर्चा नहीं की, बल्कि भविष्य में हिमालयी क्षेत्र को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग का प्रस्ताव भी रखा।

उन्होंने नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में ‘हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म’ बनाने की बात कही। इसके तहत तीनों देशों के बीच उपग्रह आंकड़े और विशेषज्ञता साझा करने, खतरनाक ग्लेशियल झीलों की निगरानी तथा आपदा की पूर्व चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रस्ताव है।

‘आपदा आने पर सीमाओं से आगे बढ़कर करें मदद’

बालेन शाह ने कहा कि हिमालय को अलग-अलग देशों में बंटी हुई सूचनाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रयोगशाला बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आपदा के समय सीमा-पार राहत और बचाव के लिए बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शाह ने बताया कि हाल की आपदा में कम से कम 1,400 लोगों की मौत और 6,000 से अधिक लोगों के लापता होने की स्थिति सामने आई है। उन्होंने पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता भी बताई।

जलवायु संकट को लेकर नेपाल ने उठाया मुद्दा

बालेन शाह ने अपने भाषण में नेपाल के बेहद कम वैश्विक उत्सर्जन योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बावजूद देश जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव झेल रहा है। उन्होंने ग्लेशियरों के पीछे हटने और पहाड़ी ढलानों के अस्थिर होने को बढ़ते खतरे के रूप में सामने रखा।

इस तरह यूएन के मंच से बालेन शाह का संदेश राहत सहायता के लिए भारत-चीन के प्रति आभार के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र में भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रहा।

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