ओमान। हवाला नेटवर्क अब सिर्फ पारंपरिक नकद लेनदेन तक सीमित नहीं रह गया है। WhatsApp, मोबाइल ट्रांसफर, डिजिटल वॉलेट और इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम के जरिए चलाए जा रहे भूमिगत बैंकिंग नेटवर्क दुनिया भर में वित्तीय अपराधों के लिए नई चुनौती बन रहे हैं। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) और OECD की हालिया संयुक्त रिपोर्ट में ओमान से पाकिस्तान तक संचालित एक ऐसे ही कथित अनधिकृत हवाला नेटवर्क का मामला सामने आया है, जिसमें एक साल के दौरान करीब 72,293 अमेरिकी डॉलर के लेनदेन का पता चला।
रिपोर्ट के मुताबिक ओमान के केंद्रीय बैंक Central Bank of Oman (CBO) को व्हिसलब्लोअर चैनल के जरिए सूचना मिली थी कि कुछ लोग बिना लाइसेंस के ओमान से पाकिस्तान के लिए सीमा-पार धन हस्तांतरण की सेवा चला रहे हैं। इसके बाद नियामक ने मामले की जांच शुरू की।

WhatsApp ग्रुप बनाकर दिया जा रहा था हवाला का ऑफर
जांच के दौरान ओमान के अधिकारियों को “XX Money Exchange” नाम के एक WhatsApp ग्रुप का पता चला। रिपोर्ट के अनुसार इस ग्रुप को विदेशी नागरिक संचालित कर रहे थे और इसके जरिए ओमान में रहने वाले प्रवासियों को विदेशी मुद्रा विनिमय और पाकिस्तान भेजे जाने वाले धन की सेवाओं का प्रचार किया जा रहा था।
ग्रुप में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कम या बिना शुल्क और औपचारिक बाजार दरों से अलग आकर्षक विनिमय दरों की पेशकश की जाती थी। साथ ही ग्राहकों से इस ग्रुप को उन लोगों के साथ साझा करने के लिए कहा जाता था, जिन्हें पैसे भेजने की जरूरत होती थी।
कैश से लेकर मोबाइल ट्रांसफर तक, ऐसे चलता था नेटवर्क
FATF रिपोर्ट के मुताबिक संदिग्ध हवाला ऑपरेटरों को ग्राहक नकद या मोबाइल से जुड़े ट्रांसफर के माध्यम से रकम देते थे। इसके बाद ऑपरेटर किसी दूसरे क्षेत्राधिकार में मौजूद पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के ई-वॉलेट के जरिए संबंधित भुगतान करते थे।
ग्राहक को भुगतान का सबूत दिखाने के लिए ई-वॉलेट ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट भेजा जाता था। इस तरह रकम का वास्तविक सीमा-पार प्रवाह पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से अलग चैनलों के जरिए संचालित किया जा रहा था।
पाकिस्तान के RAAST और डिजिटल वॉलेट के अंतर का फायदा
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस नेटवर्क ने पाकिस्तान में उपलब्ध कम लागत वाले रेमिटेंस चैनलों, जिसमें RAAST जैसे इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम के माध्यम से होने वाले ट्रांसफर शामिल हैं, का इस्तेमाल किया।
इसके अलावा कुछ डिजिटल वॉलेट और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडरों के बीच मौजूद विनिमय दर के अंतर का फायदा उठाकर हवाला ऑपरेटर अपना मार्जिन कमाते थे। इससे उन्हें ग्राहकों को अपेक्षाकृत सस्ती रेमिटेंस सेवा देने के साथ खुद भी लाभ कमाने का मौका मिलता था।
छह संदिग्ध व्यक्तियों की हुई पहचान
ओमानी अधिकारियों ने इस मामले में छह संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की, जिन्हें एक-दूसरे से जुड़े हवाला ऑपरेटरों के नेटवर्क का हिस्सा माना गया। FATF रिपोर्ट के अनुसार करीब एक वर्ष की अवधि में इस नेटवर्क के जरिए लगभग 72,293 अमेरिकी डॉलर का वित्तीय प्रवाह दर्ज किया गया।
रिपोर्ट यह मामला एक ऐसे उदाहरण के तौर पर पेश करती है कि किस तरह अनधिकृत भूमिगत बैंकिंग नेटवर्क औपचारिक वित्तीय प्रणाली के बाहर रहते हुए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
FATF की चेतावनी- बढ़ रहा है ‘डिजिटल हवाला’
FATF की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक हवाला और अन्य समान सेवा प्रदाता अब तेजी से डिजिटल तकनीक और फिनटेक प्लेटफॉर्म अपना रहे हैं। करीब 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल और तथाकथित “डिजिटल हवाला” की ओर बदलाव की पहचान की।
इसमें WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ऑपरेटरों के बीच समन्वय, बैंक ट्रांसफर, मोबाइल वॉलेट, फिनटेक ऐप और इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम के जरिए ग्राहकों से भुगतान लेने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ मामलों में वर्चुअल एसेट और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल ऑपरेटरों के बीच रकम के निपटान के लिए किया जा रहा है।
हवाला नेटवर्क मनी लॉन्ड्रिंग के लिए बड़ी चुनौती
FATF के मुताबिक भूमिगत बैंकिंग और हवाला जैसे नेटवर्क अब प्रोफेशनल मनी लॉन्ड्रिंग के प्रमुख चैनलों में शामिल हो रहे हैं। रिपोर्ट तैयार करने में करीब 45 न्यायक्षेत्रों और संगठनों से मिले इनपुट का इस्तेमाल किया गया है।
FATF ने चेताया है कि अपराधी पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से बाहर रकम को स्थानांतरित करने के लिए हवाला नेटवर्क के साथ-साथ फिनटेक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, वर्चुअल एसेट और डिजिटल वॉलेट जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे नियामकों के लिए अवैध वित्तीय प्रवाह की पहचान और निगरानी पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है।
क्या है हवाला?
हवाला एक अनौपचारिक धन हस्तांतरण प्रणाली है, जिसमें रकम भेजने वाला व्यक्ति पारंपरिक बैंकिंग चैनल के बजाय नेटवर्क में मौजूद ऑपरेटर को पैसा देता है और दूसरे स्थान पर मौजूद ऑपरेटर संबंधित व्यक्ति को रकम उपलब्ध कराता है। जब यही व्यवस्था बिना आवश्यक लाइसेंस और नियामकीय निगरानी के सीमा-पार धन हस्तांतरण के लिए इस्तेमाल होती है, तो यह मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध वित्तीय गतिविधियों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।