अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच ट्रस्ट ने अब पूरे मामले पर अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरी ने लिखित बयान जारी कर कहा है कि पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा सीईओ पद की चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे और उन्होंने 11 अगस्त को पहली पाली में साक्षात्कार दिया था।
ट्रस्ट का यह बयान पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे की ओर से चयन प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के बाद सामने आया है। राजेश पांडे ने एक बातचीत में दावा किया था कि जिन 16 अंतिम अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था, उनमें उन्हें जितेंद्र मिश्रा मौजूद नहीं दिखे थे। इसके बाद सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में भी इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई थी।
11 और 12 अगस्त को हुआ था अंतिम साक्षात्कार
गोविंद देव गिरी के लिखित स्पष्टीकरण के मुताबिक, सीईओ पद के लिए अंतिम साक्षात्कार 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या में आयोजित किए गए थे। कुल 16 अंतिम अभ्यर्थियों को आमने-सामने की बातचीत के लिए बुलाया गया था।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने 11 अगस्त की पहली पाली में साक्षात्कार में हिस्सा लिया था। हालांकि, ट्रस्ट ने यह नहीं बताया कि 11 और 12 अगस्त को किस पाली में किन-किन अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हुआ था।
यानी ट्रस्ट की ओर से फिलहाल इतना स्पष्ट किया गया है कि जितेंद्र मिश्रा चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं थे और उन्होंने निर्धारित साक्षात्कार प्रक्रिया में भाग लिया था।
5585 आवेदनों से 16 तक पहुंची थी चयन प्रक्रिया
राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए देशभर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन समिति ने कई चरणों की छंटनी और मूल्यांकन के बाद 16 अभ्यर्थियों को अंतिम चरण के लिए चुना था।
इन 16 अभ्यर्थियों का 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में अंतिम साक्षात्कार हुआ। इसके बाद चयन समिति ने तीन नामों की अनुशंसा ट्रस्ट के सामने रखी। इनमें से पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह विश्वासराव और श्रुति भारद्वाज के नाम शामिल थे।
1 सितंबर को चयन समिति ने सौंपी अंतिम रिपोर्ट
ट्रस्ट के मुताबिक, चयन समिति ने 1 सितंबर को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें ट्रस्ट को सौंप दी थीं। इसके बाद 2 सितंबर को हुई ट्रस्ट की बैठक में तीन अनुशंसित नामों पर विचार किया गया और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।
इससे पहले चयन प्रक्रिया के दौरान पूर्व आईएएस और आईपीएस अधिकारियों समेत कई वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारियों के नाम चर्चा में आए थे। अंतिम 16 अभ्यर्थियों में भी प्रशासनिक और सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारी शामिल थे। 12 अगस्त को अंतिम साक्षात्कार पूरा होने के बाद चयन समिति ने आगे की प्रक्रिया शुरू की थी।
ट्रस्ट ने कहा- चयन प्रक्रिया संस्थागत और पारदर्शी
गोविंद देव गिरी ने अपने बयान में कहा कि जितेंद्र मिश्रा के साक्षात्कार में शामिल नहीं होने संबंधी चर्चा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। ट्रस्ट का कहना है कि पूरी चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों और संस्थागत व्यवस्था के तहत कराई गई और प्रत्येक चरण का दस्तावेजी रिकॉर्ड रखा गया।
ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जितेंद्र मिश्रा का नाम अंतिम तीन अनुशंसित अभ्यर्थियों में शामिल होना इस बात की पुष्टि करता है कि उनका मूल्यांकन चयन प्रक्रिया के दौरान किया गया था।
विवाद के बीच ट्रस्ट ने बताई इंटरव्यू की तारीख और पाली
दरअसल, इस पूरे विवाद का केंद्र यही सवाल था कि क्या जितेंद्र मिश्रा अंतिम साक्षात्कार में शामिल हुए थे। अब ट्रस्ट ने पहली बार उनके साक्षात्कार की तारीख और पाली—11 अगस्त, पहली पाली—स्पष्ट रूप से बताई है।
हालांकि, ट्रस्ट ने सभी 16 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार का दिन और पालीवार विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए फिलहाल आधिकारिक तौर पर जितेंद्र मिश्रा की भागीदारी को लेकर ट्रस्ट की ओर से यही स्पष्ट जानकारी सामने आई है।
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को 2 सितंबर को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया था। अब ट्रस्ट की ओर से जारी यह स्पष्टीकरण उनके चयन को लेकर उठे सवालों पर आधिकारिक स्थिति के रूप में सामने आया है।