रायबरेली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गुरुवार को रायबरेली पहुंचे और यहां से अपनी पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत की। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई इस यात्रा के जरिए सपा अध्यक्ष कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से संवाद करेंगे। अखिलेश यादव विशेष रूप से तैयार किए गए रथ पर सवार होकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाएंगे।
अखिलेश यादव की यह यात्रा बछरावां क्षेत्र से शुरू होकर हरचंदपुर सहित अन्य इलाकों तक जाने का कार्यक्रम है। इस दौरान वह हरचंदपुर के सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर भी जाएंगे और स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। यात्रा के दौरान संगठनात्मक गतिविधियों और स्थानीय मुद्दों को लेकर भी संवाद प्रस्तावित है।
17 सितंबर की घटना के बाद रायबरेली पर खास फोकस
रायबरेली में 17 सितंबर को समाजवादी छात्र सभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों के बीच विवाद हुआ था। सपा की ओर से इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी के अनुसार, इसी घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव ने रायबरेली आने और हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी के घर जाने की बात कही थी। यह दावा पार्टी की ओर से किया गया है।
पीडीए के मुद्दों पर संपर्क बढ़ाने की तैयारी
सपा की ओर से पीडीए का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों से जोड़ा जाता है। पार्टी नेताओं के अनुसार, यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में ऐसे लोगों और परिवारों से भी संपर्क किया जाएगा, जो किसी प्रशासनिक या पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी शिकायत रखते हैं। यात्रा को संगठन को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने के कार्यक्रम के रूप में बताया गया है।
रायबरेली से यात्रा शुरू करने पर सियासी चर्चा
अखिलेश यादव ने अपनी यात्रा की शुरुआत रायबरेली से की है। रायबरेली लोकसभा क्षेत्र से राहुल गांधी सांसद हैं। ऐसे में सपा अध्यक्ष की यात्रा को लेकर सपा-कांग्रेस संबंधों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में राजनीतिक चर्चा भी तेज हुई है। हालांकि, यात्रा का पार्टी की ओर से घोषित फोकस कार्यकर्ताओं से संवाद और पीडीए से जुड़े मुद्दों पर संपर्क है।
विशेष रूप से तैयार किए गए रथ पर समाजवादी विचारधारा से जुड़े प्रमुख नेताओं के चित्र लगाए गए हैं। सपा की इस यात्रा को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।