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अयोध्या में सरयू को प्रदूषण से मिली बड़ी राहत, 260 करोड़ की सीवेज परियोजनाएं पूरी, रोज 3.3 करोड़ लीटर पानी होगा साफ

नई दिल्ली/अयोध्या। सरयू नदी के किनारे बसे धार्मिक नगरी अयोध्या ने स्वच्छता और जल प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत करीब 260 करोड़ रुपये की लागत से दो प्रमुख सीवेज परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर का गंदा और अनुपचारित पानी सीधे सरयू नदी में गिरने से रोक दिया गया है। इन परियोजनाओं में 3.3 करोड़ लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और नालों के इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन नेटवर्क का निर्माण शामिल है। इससे अयोध्या में सीवेज के वैज्ञानिक उपचार की क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है।

सरयू में नहीं जाएगा शहर का गंदा पानी

अयोध्या में लंबे समय से नालों के जरिए गंदा पानी सरयू में पहुंचने की समस्या बनी हुई थी। एनएमसीजी के तहत तैयार इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन नेटवर्क के माध्यम से नालों के प्रवाह को मोड़कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। इससे नदी में सीधे गिरने वाले अनुपचारित सीवेज को रोकने में मदद मिली है। परियोजना का उद्देश्य सरयू की स्वच्छता और नदी के पारिस्थितिक संतुलन को बेहतर बनाना है।

3.3 करोड़ लीटर प्रतिदिन की बढ़ी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता

परियोजना के तहत तैयार नए एसटीपी की क्षमता 3.3 करोड़ लीटर प्रतिदिन है। वर्ष 2025 में इसके शुरू होने के बाद अयोध्या की सीवेज उपचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इससे शहर में उत्पन्न होने वाले सीवेज को वैज्ञानिक तरीके से उपचारित करने की व्यवस्था मजबूत हुई है।

2021 में शुरू हुआ था नालों को मोड़ने का काम

अयोध्या में सीवेज प्रबंधन की इस व्यवस्था को तैयार करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ी। वर्ष 2021 में नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन का काम शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य नालों के गंदे पानी को सीधे सरयू में जाने से रोकना था। इसके बाद नए एसटीपी के संचालन से सीवेज उपचार व्यवस्था को और मजबूती मिली।

2018 में रखी गई थी परियोजना की नींव

अयोध्या में सरयू को स्वच्छ रखने के लिए एनएमसीजी की योजना की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। उस समय करीब 50 लाख लीटर प्रतिदिन सीवेज नदी में पहुंचाने वाले पांच प्रमुख नालों को रोकने की परियोजना को मंजूरी दी गई थी।उस समय शहर में पहले से 1.2 करोड़ लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला एसटीपी संचालित था। नई परियोजना के बाद सीवेज उपचार की क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है।

नमामि गंगे मिशन से जुड़ी व्यापक पहल

अयोध्या में सीवेज परियोजनाएं नमामि गंगे कार्यक्रम के व्यापक अभियान का हिस्सा हैं। इस मिशन के तहत नदी संरक्षण के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, रिवरफ्रंट विकास, पारिस्थितिकी बहाली, वनीकरण, जैव विविधता संरक्षण और जनभागीदारी जैसे क्षेत्रों में भी काम किया जा रहा है।एनएमसीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अयोध्या की इस उपलब्धि को साझा करते हुए इसे स्वच्छ जल प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है।

आस्था के साथ स्वच्छता की नई पहचान

अयोध्या दुनियाभर में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। अब सरयू की स्वच्छता और आधुनिक जल प्रबंधन व्यवस्था के जरिए शहर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी नई मिसाल पेश कर रहा है। सरयू में प्रदूषित पानी का प्रवाह रोकने और सीवेज के वैज्ञानिक उपचार की व्यवस्था मजबूत होने से ‘स्वच्छ जल, स्वस्थ शहर और समृद्ध अयोध्या’ के संकल्प को नई गति मिली है।

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