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SEMICON India 2026: सेमीकंडक्टर में भारत की बड़ी छलांग, 56 एमओयू के साथ सेमीकॉन 2.0 का आगाज: अब चिप से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर फोकस

नई दिल्ली। भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को नई गति देते हुए SEMICON India 2026 का पांचवां संस्करण 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित हुआ। ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ थीम पर हुए इस आयोजन में 52 देशों के प्रतिनिधियों और 600 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया। इनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल रहीं। तीन दिनों के आयोजन में 51,656 पंजीकरण, करीब 40,000 की संचयी फुटफॉल और 56 एमओयू/घोषणाएं दर्ज की गईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने भारत के सेमीकंडक्टर सफर को केवल चिप निर्माण तक सीमित रखने के बजाय डिजाइन, उपकरण, सामग्री, पैकेजिंग, अनुसंधान, प्रतिभा और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणालियों तक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब नीतिगत चर्चा और परियोजना योजना से आगे बढ़कर व्यावसायिक उत्पादन के चरण में पहुंच रहा है।

सेमीकॉन 2.0 के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बड़ा रोडमैप

SEMICON India 2026 की सबसे अहम कड़ी Semicon 2.0 रही। केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में इसके लिए ₹1,27,500 करोड़ के बजट परिव्यय को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करना है।

सेमीकॉन 2.0 को छह प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ाया जा रहा है—

– चिप डिजाइन

– मशीन और सामग्री

– नए फैब

– उन्नत पैकेजिंग

– अनुसंधान एवं विकास

– प्रतिभा और कौशल विकास

इसका मतलब यह है कि भारत का अगला लक्ष्य केवल चिप बनाने वाली कुछ इकाइयां स्थापित करना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर अंतिम इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली तक घरेलू क्षमता तैयार करना है।

नीति से उत्पादन तक पहुंचा भारत

प्रधानमंत्री के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मोहाली की CDIL Semiconductor और सूरत की Suchi Semicon की व्यावसायिक उत्पादन लाइनों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया गया। सरकार के मुताबिक इससे Semicon 1.0 के तहत मंजूर 12 परियोजनाओं में व्यावसायिक रूप से संचालित इकाइयों की संख्या पांच हो गई है।

यह बदलाव भारत के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण चरण को दर्शाता है—जहां शुरुआती दौर में नीतियां, प्रोत्साहन और परियोजनाओं की मंजूरी केंद्र में थीं, वहीं अब उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी पर जोर बढ़ रहा है।

अमेरिका से जापान तक, वैश्विक कंपनियों की भागीदारी

यशोभूमि में आयोजित इस सम्मेलन में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह देशीय मंडप बनाए गए। इसके अलावा 12 राज्यों के मंडप, स्टार्टअप पवेलियन, नवाचार प्रदर्शनी, छात्र हैकाथॉन और कार्यबल विकास क्षेत्र भी आयोजन का हिस्सा रहे।

अमेरिका और जापान के साथ अलग-अलग देशीय गोलमेज बैठकों में संयुक्त उपक्रम, निवेश, अनुसंधान, आपूर्ति श्रृंखला और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत-अमेरिका संवाद में 64 भारतीय कंपनियों और 52 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

Applied Materials का ₹42 हजार करोड़ से अधिक का निवेश प्लान

सम्मेलन के दौरान अमेरिकी सेमीकंडक्टर उपकरण कंपनी Applied Materials ने भारत में अगले दशक में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश की योजना की घोषणा की। Reuters के अनुसार यह निवेश अनुसंधान, आपूर्ति श्रृंखला विकास और कार्यबल विस्तार सहित भारत में कंपनी की मौजूदगी बढ़ाने पर केंद्रित होगा।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब वैश्विक कंपनियां सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को अधिक विविध और लचीला बनाने पर जोर दे रही हैं।

एआई के दौर में चिप की बढ़ती अहमियत

SEMICON India 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के साथ बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता और सेमीकंडक्टर की मांग पर भी विशेष जोर रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई डेटा सेंटरों में बड़ी संख्या में उच्च क्षमता वाले प्रोसेसर काम करते हैं और एआई के विस्तार के साथ कंप्यूटिंग पावर की जरूरत बढ़ेगी। इसके साथ ऊर्जा की मांग भी बढ़ेगी।

इसीलिए भारत के लिए सेमीकंडक्टर रणनीति को ऊर्जा, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और डिजिटल बुनियादी ढांचे से जोड़कर देखना महत्वपूर्ण हो गया है।

डिजाइन से सिस्टम तक पूरा चक्र बनाने की कोशिश

इस बार आयोजन में ‘Sand to Silicon to Systems Value Chain Experience’ के जरिए सेमीकंडक्टर की पूरी यात्रा को प्रदर्शित किया गया। इसमें कच्चे माल और उपकरण से लेकर चिप डिजाइन, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम तक की पूरी श्रृंखला को दिखाया गया।

सरकार का जोर अब फैबलेस चिप डिजाइन कंपनियों, बौद्धिक संपदा, सिलिकॉन फोटोनिक्स, उपकरण, रसायन, गैस और अन्य सामग्रियों की घरेलू क्षमता विकसित करने पर भी है। प्रधानमंत्री ने उद्योग से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ विकसित करने का आह्वान किया।

52 देशों की भागीदारी, 600 से अधिक कंपनियां

आयोजन में 52 देशों, 600 से अधिक कंपनियों, 400 से ज्यादा उद्योग अधिकारियों और 150 से अधिक वक्ताओं की भागीदारी रही। करीब 50 हजार आगंतुकों के पहुंचने का अनुमान आयोजन से पहले लगाया गया था। तीन दिनों में 56 एमओयू और रणनीतिक घोषणाओं ने डिजाइन, विनिर्माण, पैकेजिंग, सामग्री, उपकरण, अनुसंधान, स्टार्टअप और प्रतिभा विकास से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाया।

क्यों महत्वपूर्ण है SEMICON India 2026?

भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा अब केवल ‘चिप बनाने’ की परियोजना नहीं रह गई है। Semicon 2.0 के ₹1.27 लाख करोड़ के प्रावधान, व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने वाली नई इकाइयों, वैश्विक कंपनियों के निवेश और 56 नई घोषणाओं से सरकार का फोकस पूरे सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला पर दिखाई देता है। आने वाले वर्षों में डिजाइन, विनिर्माण, पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री और कुशल मानव संसाधन—इन सभी क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाना इस रणनीति का प्रमुख हिस्सा होगा।

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