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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले BJP की बड़ी रणनीति, 13 MLC लड़ेंगे विधानसभा चुनाव 8 मंत्री भी मैदान में उतारने की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी के भीतर विधानसभा चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन तेज हो गया है। इसी क्रम में भाजपा के करीब 13 विधान परिषद सदस्यों (MLC) को विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी की जा रही है। इनमें करीब 8 मंत्री भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी के अंदर इस रणनीति को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी की चुनाव समिति की मंजूरी के बाद ही होगा।

मंत्रियों को अलग-अलग क्षेत्रों से चुनाव लड़ाने की तैयारी

भाजपा की रणनीति के तहत विधान परिषद सदस्य और मंत्री रहे नेताओं को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में विधानसभा चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी है। संभावित नामों में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का नाम भी शामिल है। उन्हें प्रयागराज क्षेत्र से चुनाव लड़ाए जाने की चर्चा है।इसी तरह कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को बुंदेलखंड क्षेत्र, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जयेंद्र प्रताप सिंह राठौर (जेपीएस राठौर) को अवध क्षेत्र, जबकि कैबिनेट मंत्री अरविंद कुमार शर्मा को मऊ क्षेत्र से चुनाव लड़ाने की चर्चा है।

इसके अलावा जसवंत सिंह को सहारनपुर क्षेत्र और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसी विधानसभा सीट से मैदान में उतारने की चर्चा है।उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक सूची में केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री, स्वतंत्र देव सिंह कैबिनेट मंत्री, अरविंद कुमार शर्मा कैबिनेट मंत्री और जयेंद्र प्रताप सिंह राठौर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में दर्ज हैं।

विधानसभा चुनाव के लिए MLC चेहरों पर BJP का भरोसा

भाजपा की इस रणनीति को विधानसभा चुनाव में अनुभवी और संगठनात्मक रूप से मजबूत चेहरों को सीधे मैदान में उतारने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ऐसे नेताओं को उन क्षेत्रों में उतार सकती है, जहां उनका संगठनात्मक प्रभाव और राजनीतिक पकड़ मजबूत मानी जाती है। विधान परिषद में भाजपा की मौजूदा स्थिति भी मजबूत है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की आधिकारिक दलीय स्थिति के अनुसार भाजपा के पास 79 सदस्य हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास 10 सदस्य हैं।

क्षेत्रीय समीकरण साधने पर जोर

भाजपा की प्रस्तावित रणनीति में पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को साधने की कोशिश दिखाई दे रही है। पार्टी का फोकस ऐसे नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतारने पर है, जो संगठन के साथ-साथ अपने क्षेत्र में भी प्रभाव रखते हैं। हालांकि अभी इन नेताओं की सीटों और उम्मीदवारी को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पार्टी स्तर पर अंतिम निर्णय के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

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