महराजगंज। नौतनवां तहसील क्षेत्र के ग्राम सेमरहवां की महिला को जंगल में दबोचकर मार डालने वाले आदमखोर तेंदुए का खौफ अभी भी बना हुआ है। रविवार की रात तेंदुआ गांव में घुस आया था। एक बकरी को मारकर उठा ले गया, जबकि दूसरे पर हमला कर जख्मी कर दिया। लोगों का शोर सुनकर तेंदुआ जंगल की ओर भाग निकला। वहीं तेंदुए के खौफ से गांव में सन्नाटा सा पसर गया है। बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया जा रहा है और घर से लोग लाठी-डंडों के साथ निकल रहे हैं।
रविवार को जंगल किनारे खेत में काम करने गई 40 वर्षीया शारदा को तेंदुआ जबड़े में दबोचकर एक किमी दूर जंगल में सबकी आंखों के सामने से उठा ले गया था। महिला को मार डाला। इसका खौफ अभी लोगों के अंदर समाया ही हुआ है कि रात को तेंदुआ पुनः गांव में घुस आया और गोरख प्रसाद के बरामदे से बकरी को उठा ले गया। साथ ही गांव निवासी श्रीपत के बकरी को पंजे से मारकर घायल कर दिया। काफी शोर मचाने के बाद तेंदुआ गांव छोड़कर भाग निकला। इसके बाद ग्रामीण पूरी रात तेंदुए के खौफ में जगकर समय काटे। दरवाजा बंद कर बच्चे, महिलाओं व बुजुर्ग दुबके रहे।
मवेशियों को भी सुरक्षित जगहों पर बांधा गया। ग्रामीण महेन्द्र यादव व मनोज बहादुर का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या मवेशियों के चारे की हो गयी है, क्योंकि चारा जंगल किनारे से ही आता था।
आस पास के कई गांवों में पसरा सन्नाटा
सेमरहवां, चरैया, कुअहवां, कजरी, हनुमानगढ़िया सहित निकट के गांवों में भी आदमखोर तेंदुए का खौफ इस कदर छा गया है कि लोग दिन में भी समूह में लाठी-डंडा लेकर निकल रहे हैं। सेमरहवां गांव में तो पूरा दिन सन्नाटा पसरा रहा और गांव में मातम का माहौल रहा।
ग्रामीण खुद कर रहे हैं गांव की सुरक्षा
सेमरहवां गांव निवासी सीताराम, रामधनी, हरीराम, जनार्दन, कन्हैया व शारदा का आरोप है कि 24 घंटा बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने गांव में सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं किया। वन विभाग ने भी तेंदुए को पकड़ने के लिए पिजरा नहीं लगवाया। इस वजह से गांव के लोग खुद गांव की सुरक्षा जोखिम उठाकर कर रहे हैं।