उमेश तिवारी
महराजगंज। योगी सरकार ने बीते 29 सितम्बर को 10 आईएएस अफसरों का तबादला किया था जिनमें महराजगंज के वर्तमान जिलाधिकारी का तबादला करते हुए उन्हें बाराबंकी जिले का जिलाधिकारी बनाया गया तो वहीं महराजगंज के नए जिलाधिकारी अनुनय झा को बनाया गया है। आइए जानते हैं कौन है अनुनय झा ?
यूपीएससी एक ऐसी प्रतियोगी परीक्षा है जिसमें सफलता हासिल करने का सपना लाखों अभ्यर्थी हर साल देखते हैं, लेकिन कुछ अभ्यर्थियों को ही इस कठिन परीक्षा में सफलता हासिल मिल पाती है। बाकी का सपना, सपना ही रह जाता है। यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए बेहद कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। यही वजह है कि जो अभ्यर्थी इस परीक्षा में सफलता हासिल करते हैं, वो अन्य अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का श्रोत बन जाते हैं। आज के इस पोस्ट में हम एक ऐसे आईएएस अधिकारी की सफलता की कहानी के बारे में बताएंगे जिन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में सफलता का परचम लहरा दिया। इस आईएएस अधिकारी का नाम अनुनय झा है।
कौन हैं आईएएस अनुनय झा
अनुनय झा झारखंड राज्य के देवघर के रहने वाले हैं। इनके पिता का नाम नित्यानंद झा है। इनके पिता भी सिविल सर्विसेज में अपना योगदान दे चुके हैं। इनकी माता का नाम अलका झा है जो भारतीय डाक विभाग के बोर्ड की सदस्य हैं। अनुनय की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के चाणक्यपुरी संस्कृत स्कूल से हुई है। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहने वाले अनुनय ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेज आईआईटी रुड़की में इंजीनियरिंग के लिए प्रवेश लिया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विश्व बैंक के एक प्रोजेक्ट में कुछ समय तक काम किया । लेकिन बचपन से ही समाज सेवा में रुचि होने की वजह से अनुनय यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुट गए।
आईएएस अधिकारी के पावर को जमीनी स्तर पर लागू हेतु लिया कड़ा फैसला
अपने आईएएस बनने के सफर के अनुभव को साझा करते हुए अनुनय झा ने मीडिया को बताया कि जब वह विश्व बैंक के प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे तब उन्हें एहसास हुआ कि किसी भी प्रोजेक्ट को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए आवश्यक है कि हाथ में पावर हो, और ये पावर एक आईएएस अधिकारी के पास होता है।
नाना का सपना पूरा करने के लिए इंजीनियरिंग छोड़कर शुरू की यूपीएससी परीक्षा की तैयारी, दूसरे प्रयास में बनें आईएएस अधिकारी
इस प्रोजेक्ट से जुड़ने के बाद ही इनके मन में आईएएस अधिकारी बनने की आस जगी। इस आस को पूरा करने के लिए ये तैयारी में जुट गए। इनकी कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत आज इन्होंने अपने आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया है।
57 वीं रैंक हासिल कर बनें आईएएस अधिकारी
साल 2013 में पहले ही प्रयास में अनुनय ने ऑल इंडिया में 145 वीं रैंक हासिल करने के साथ यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। इस परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद इन्हें इंडियन रिवेन्यू सर्विस (आईआरएस ) पोस्ट मिली। लेकिन इनका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था। इसलिए इन्होंने यूपीएससी का प्रयास करना नहीं छोड़ा और इनकी मेहनत रंग लाई और दूसरे प्रयास में फिर यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल कर लिए। साल 2014 में ऑल इंडिया 57 वीं रैंक के साथ इन्होंने यूपीएससी में सफलता हासिल की और आईएएस अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया।
अनुनय झा ने एक पत्रकार वार्ता में बताया है कि उनके नाना डीजीपी थे। सिविल सेवाओं में आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करने की प्रेरणा उन्हें अपने नाना से ही मिली। अनुनय के नाना स्वर्गीय बलबीर झा 1962 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और 1994-97 वो बिहार के डीजीपी भी रहे थे। उनका सपना पूरा करने के लिए भी अनुनय ने आईएएस अधिकारी बनने का फैसला किया था।