अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब ट्रस्ट में होने वाले भुगतान और वित्तीय लेनदेन की निगरानी ERP (Enterprise Resource Planning) सिस्टम के जरिए की जाएगी। इस डिजिटल प्रणाली के लागू होने के बाद खरीद प्रक्रिया से लेकर बिल, भुगतान, स्टॉक, टेंडर, अनुबंध और लेखा संबंधी कार्य एक ही प्लेटफॉर्म पर संचालित किए जा सकेंगे।
भुगतान की शुरुआत से अंतिम मंजूरी तक ऑनलाइन रिकॉर्ड
ERP सिस्टम के माध्यम से किसी भी भुगतान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज रहेगी। बिना आवश्यक अनुमोदन, डिजिटल रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए कोई भी बिल भुगतान के लिए आगे नहीं बढ़ सकेगा। प्रत्येक वित्तीय लेनदेन का डिजिटल ट्रेल उपलब्ध रहने से ऑडिट और सत्यापन भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।ट्रस्ट के अधिकारी ऑनलाइन किसी भी समय वित्तीय लेनदेन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने के साथ जिम्मेदारी भी तय करने में मदद मिलेगी।
12 अगस्त को होगा राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद का इंटरव्यू
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच गई है। ट्रस्ट की ओर से CEO पद के लिए 12 अगस्त को साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। बताया गया कि CEO पद के लिए देशभर से करीब 5,400 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। आवेदन की अंतिम तिथि 18 जून थी। इसके बाद शैक्षिक योग्यता, प्रशासनिक अनुभव और निर्धारित मानकों के आधार पर आवेदनों की स्क्रीनिंग की गई। स्क्रीनिंग में सफल अभ्यर्थियों को अब इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। साक्षात्कार के बाद चयनित अभ्यर्थी को ट्रस्ट के CEO पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
राम मंदिर के पुजारी अब केवल पीतवस्त्र में करेंगे पूजा
उधर, राम मंदिर में इस बार सावन झूलनोत्सव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। राम मंदिर धर्म समिति की ऑनलाइन बैठक में झूलनोत्सव और आगामी धार्मिक आयोजनों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि इस बार श्रावण शुक्ल तृतीया यानी 15 अगस्त से झूलनोत्सव का शुभारंभ होगा। राम मंदिर में पहली बार नई परंपरा के तहत श्रावण शुक्ल तृतीया से ही झूलनोत्सव शुरू किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंदिर के पुजारी अब केवल पीतवस्त्र धारण कर पूजा-अर्चना करेंगे। सावन शुक्ल तीज के अवसर पर रामलला को भी सावन के अनुरूप विशेष वस्त्र धारण कराने की तैयारी है।
कुबेर टीला की ओर आयोजन बढ़ाने पर जोर
भगवान की शोभायात्रा को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए शोभायात्रा को मंदिर परिसर तक सीमित रखने तथा कुबेर टीला की ओर अधिक से अधिक आयोजन कराने पर विचार किया गया। झूलनोत्सव के दौरान रामलला को लगाए जाने वाले भोग को लेकर भी सुझाव आए। इसमें मालपुआ, रबड़ी, दही समेत पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाने पर चर्चा हुई। सावन झूलनोत्सव के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और परंपरागत आयोजनों को भव्य स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है।