दिल्ली। जस्टिस बी आर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मोदी सरनेम के मानहानि मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए पहले 15 मिनट अभिषेक मनु सिंघवी को और अगले 15 मिनट महेश जेठमलानी को अपनी दलील रखने का समय दिया।
राहुल गांधी की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा राहुल गांधी ने अपने भाषण में जिन लोगों का नाम लिया था उनमें से एक ने भी मुकदमा नहीं किया। यही नहीं य़ह दिलचस्प और अजीब है कि 13 करोड़ के समुदाय में से केवल BJP के पदाधिकारी ही मुकदमा दायर कर रहे हैं।
जस्टिस गवई ने कहा कि अगर आपको सजा पर रोक चाहिए तो इसे एक असाधारण मामला बनाना होगा।सिंघवी ने कहा उस 13 करोड़ की आबादी में न कोई पहचान की एकरूपता है और न कोई सीमा रेखा है। वही याचिकाकर्ता पूर्णेश मोदी ने स्वयं कहा कि उनका मूल उपनाम मोदी नहीं था।
उन्होंने कहा कि कोई भी आरोप किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला तबतक नहीं माना जा सकता जब तक कि यह किसी व्यक्ति की बौधिक या नैतिक स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा को कम न करे।उन्होंने कोर्ट को बताया कि गवाह ने भी य़ह स्वीकार किया है कि उन्हें राहुल गांधी के मोदी सरनेम वाले सभी लोगों को बदनाम करने के इरादे के बारे में उनको पता नहीं है।
सिंघवी ने कहा कि य़ह कोई अपहरण, रेप या हत्या का मामला नहीं है। मानहानि के गैर जमानती मामला, जिसमें में दो साल की सजा अधिकतम हो, वह सजा देकर उन्हें आठ साल के लिए चुप करा दिया गया। शायद ही दो साल की सजा ऐसे मामले में दी गई हो।
सिंघवी ने कहा मुझे और किसी भी दुसरे मामले में दोषी नहीं पाया गया है। राजनीति में आपसी सम्मान होना जरूरी है। राहुल गांधी कोई अपराधी नही है। वही कई सारे मामले जो दर्ज किए गए है वह BJP कार्यकर्ताओ द्वारा दाखिल किए गए है। जिनमे से किसी भी मामले में सजा नहीं हुई है।जस्टिस गवई ने कहा कि हाईकोर्ट ने भी नैतिक अक्षमता के बारे में टिप्पणी की ?
सिंघवी ने कहा लोकतंत्र में हमारे पास असहमति का हक है।जिसे हम शालीन भाषा कहते हैं।सिंघवी ने कहा कि हाई कोर्ट ने लगभग दो महीने लगे फैसला देने में मई में फैसला सुरक्षित रखा और जुलाई मैं फैसला दिया गया।
कोर्ट ने सिंघवी को कहा की यहां पर राजनीतिक बहस न करें। हम केवल अभी सजा की रोक पर विचार कर रहे है।जस्टिस गवाई ने हंसते हुए सिंघवी को कहा की आप इस राजनीतिक बहस को राज्य सभा के लिए बचा कर रखे।जिसके बाद सिंघवी भी मुस्कुराए।
सिंघवी ने कहा कि अभी तक राहुल गांधी के खिलाफ कोई सबूत नहीं क्योंकि शिकायकर्ता ने न्यूज पेपर के आधार पर शिकायत दर्ज कराई। जो उसके WhatsApp पर आई थी और तो और उस स्पीच का कोई सबूत भी नहीं है।
जस्टिस गवई ने कहा कि सिर्फ एक व्यक्ति का अधिकार प्रभावित नहीं हो रहा है बल्कि एक मतदाता का अधिकार प्रभावित हो रहा है। हालाकि कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने अधिकतम सजा दी है। उन्हें इसका कारण बताना चाहिए था? कोर्ट ने पुछा हम ये जानना चाहते है की आखिर इस मामले में अधिकतम सजा क्यों हुई है? अदालत ने अधिकतम 2 साल की सजा क्यों दी है? अगर कुछ महीने या 2 साल से कम होती तो अयोग्यता न होती?
जस्टिस गवई ने हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का फैसला दिलचस्प है। जिसमें बताया गया है कि एक सांसद को कैसे बर्ताव करना चाहिए? वही वकील महेश जेठमलानी ने कहा की राहुल ने पहले भी इस तरह का बयान दिया था। जिसमें राफेल मामले को लेकर उन्होंने कहा की चौकीदार चोर है। जिसके बाद मोदी ने माफी भी मांगी थी।
इस मामले में राहुल कहते है कि वह माफी नहीं मांगेंगे इसका मतलब है कि आप जो चाहते हैं वह करें। मामले में शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी के वकील महेश जेठ मलानी ने अपनी दलील देते हुए कहा राहुल की स्पीच को पूरे देश ने सुना। राहुल की स्पीच को अदालत में भी सुनाया गया था। उनके स्पीच की कॉपी निर्वाचन आयोग के पास भी है।
उन्होंने कहा कि राहुल की टिप्पणी मान हानि करने वाली है। राहुल ने कहा कि इन सब चोरों के नाम मोदी मोदी मोदी कैसे हैं? ललित मोदी, नीरव मोदी, थोड़ा और ढूंढोगे तो और भी मिलेंगे।कोर्ट ने महेश से पुछा की राहुल गांधी का कहना है कि मीडिया में चली क्लिप में कुछ वाक्य मिसिंग थे।
वकील महेश जेठमलानी ने कहा कुल 50 मिनट का भाषण है। जिसकी तीन CD पेश की गई थी। जिसमें दूसरे नंबर वाली CD में सबूत है। जिस व्यक्ति को आदर्श आचार संहिता का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग के निर्देश पर तैनात किया गया था उसने रिकॉर्डिंग किया गया था।वह अभियोजन पक्ष का गवाह है। इस मामले मे फ़ोटोग्राफ़र, कैमरा मैन भी गवाह है।
उन्होंने कहा कि राहुल कैसे कह सकते है की उनको दिए गए स्पीच ध्यान में नही है? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि कितने नेताओं को इस बात का ध्यान होगा की कि उन्होंने पब्लिक मीटिंग या रैली में क्या कुछ कहा है जब वो कई रैलियां करते है।
जेठमलानी ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति को चुनना निर्वाचन क्षेत्र का अधिकार है जो दोषी नहीं है लेकिन राहुल को कोई पछतावा ही नहीं दिखता। जस्टिस नरसिम्हा ने सवाल उठाया कि इस मामले में सजा की अधिकतम अवधि की क्या जरूरत थी? कोर्ट ने कहा थोड़ी देर में दोबारा मामले की सुनवाई करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपील लंबित रहने तक राहुल की दोष सिद्धि पर रोक लगाई
राहुल गांधी की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा उनकी टिप्पणी अच्छे प्रभाव की नहीं थी। उन्हें पब्लिक लाइफ में इस पर सतर्क रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा अधिकतम सजा जो हो सकती थी वो वह गांधी को दीगई। कोर्ट ने निचली अदालत ने ये साफ नही किया कि अधिकतम सजा की जरूरत क्यो थी।