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अयोध्या राम मंदिर में लागू हुआ ड्रेस कोड, अब पीत वस्त्रों में नजर आएंगे रामलला के सभी अर्चक

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की सेवा में लगे सभी अर्चकों के लिए अब ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत मंदिर के सभी अर्चक एक समान पीत वस्त्र धारण करेंगे। मौसम में बदलाव के बावजूद अर्चकों के वस्त्र का रंग पीत ही रहेगा। गर्मी के मौसम में अर्चकों के लिए नीचे धोती और ऊपर उत्तरीय धारण करने का प्रावधान किया गया है। अर्चकों को दिए जाने वाले वस्त्र सिले हुए नहीं, बल्कि पारंपरिक रूप से बिना सिले हुए होंगे। गर्मी में रेशमी सिल्क के वस्त्रों का उपयोग किया जाएगा, जबकि शरद ऋतु में मौसम के अनुरूप ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे। मंदिर में लागू किए गए इस ड्रेस कोड का उद्देश्य रामलला की सेवा व्यवस्था में एकरूपता और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना है।

सावन शुक्ल तृतीया पर राम मंदिर में शुरू हुआ झूलनोत्सव

इधर, अयोध्या में सावन शुक्ल तृतीया के अवसर पर भव्य झूलनोत्सव की शुरुआत हुई। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में रामलला के चल विग्रह को विशेष पालकी में विराजमान कर मंदिर परिसर में भ्रमण कराया गया। इसके बाद रामलला अपने तीनों भाइयों के साथ कुबेर टीला पहुंचे, जहां झूलनोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुरूप विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न हुए।

सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा है अयोध्या का झूलनोत्सव

अयोध्या का झूलनोत्सव सदियों पुरानी धार्मिक एवं शास्त्रीय परंपरा का हिस्सा माना जाता है। पद्म पुराण में भी झूलनोत्सव की महिमा का वर्णन मिलता है। अयोध्या में मणि पर्वत को झूलनोत्सव की शुरुआत के प्रमुख केंद्रों में माना जाता है। झूलनोत्सव के अवसर पर कनक भवन, दशरथ महल, हनुमत निवास और मणिराम दास छावनी सहित कई प्रमुख मंदिरों से भगवान के विग्रह शोभायात्रा के साथ मणि पर्वत पहुंचे। यहां विशेष रूप से सजाए गए झूलों पर विग्रहों को विराजमान कराया गया।

भजन-कीर्तन से गूंज उठी रामनगरी

झूलनोत्सव के दौरान संतों और श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन तथा झूलन के पारंपरिक पदों का गायन किया। धार्मिक गीतों और जयकारों से पूरी रामनगरी भक्तिमय नजर आई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव के साक्षी बने।

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम

झूलनोत्सव में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। मेला क्षेत्र को जोन और सेक्टर में विभाजित कर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

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