ग्रेटर नोएडा। रविवार की दोपहर को भूकंप के झटके लगे। कुछ समय के दौरान एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इसको लेकर विशेषज्ञ भी काफी चिंतित हैं। पिछले कुछ महीनों के दौरान 5 बार से अधिक भूकंप आया। यह अपने आपमें बहुत बड़ा और चिंताजनक मुद्दा है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
आईआईटी कानपुर सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर और जियोसाइंस इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ प्रो.जावेद एन मलिक ने कहा, “हिमालय रेंज में टेक्टोनिक प्लेट अस्थिर हो गई है। इसके चलते अब लंबे समय तक इस तरह के भूकंप आते रहेंगे। पिछले दो बार आए भूकंप का भी यह एक बड़ा कारण है। यह झटके हिमालयन रेंज पर आते हैं।”
पिछले 7 महीनों में कब-कब आया भूकंप
15 अक्टूबर 2023
3 अक्टूबर 2023
17 जुलाई 2023
14 जून 2023
13 जून 2023
30 अप्रैल 2023
भारत के लोगों में गलत धारणा
प्रो.जावेद मलिक का कहना है, “वह खुद और उनकी टीम लंबे समय से भूकंप को लेकर अध्ययन कर रही है। इसमें भारत के लिए एक तरह की चिंताजनक स्थिति बन रही है। अगर लोग सोच रहे हैं कि भारत में बड़े भूकंप नहीं आएंगे तो वह गलत हैं।” उनका कहना है कि भूकंप आने पर लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
इसलिए आता है भूकंप
वैज्ञानिक का कहना है कि धरती की चार परतें हैं। जिसमें इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट है। क्रस्ट और ऊपरी मेनटल कोर को लिथोस्फेयर कहा जाता है। अब यह 50 किलोमीटर की मोटी परत कई वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। यानि धरती की ऊपरी सतह 7 टेक्टोनिक प्लेटों से मिलकर बनी है। ये प्लेटें कभी भी स्थिर नहीं होतीं। ये लगातार हिलती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक दूसरे की तरफ बढ़ती हैं तो इनमें आपस में टकराव होता है। कई बार ये प्लेटें टूट भी जाती हैं। इनके टकराने से बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जिससे इलाके में हलचल होती है। कई बार ये झटके काफी कम तीव्रता के होते हैं, इसलिए ये महसूस भी नहीं होते। जबकि कई बार इतनी ज्यादा तीव्रता के होते हैं, कि धरती फट भी जाती है।
राजधानी में हमेशा बना रहता है तेज भूकंप का खतरा
दिल्ली में बड़े भूकंप का अंदेशा काफी समय से लगाया जा रहा है। जानकार मानते हैं कि राजधानी में बड़ी तीव्रता का भूकंप आ सकता है। असल में दिल्ली भूकंपीय क्षेत्रों के जोन 4 में स्थित है। देश को इस तरह के चार जोन में बांटा गया है। जोन-4 में होने की वजह से दिल्ली भूकंप का एक भी भारी झटका बर्दाश्त नहीं कर सकती। दिल्ली हिमालय के निकट है, जो भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलने से बना था। धरती के भीतर की इन प्लेटों में होने वाली हलचल की वजह से दिल्ली, कानपुर और लखनऊ जैसे इलाकों में भूकंप का खतरा सबसे ज्यादा है।
दिल्ली एनसीआर का इलाका बेहद संवेदनशील
दिल्ली के पास सोहना, मथुरा और दिल्ली-मुरादाबाद तीन फॉल्ट लाइन मौजूद हैं। इसके चलते भूकंप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। दिल्ली रिज क्षेत्र कम खतरे वाला क्षेत्र है। वहीं मध्यम खतरे वाले क्षेत्र हैं दक्षिण पश्चिम, उत्तर पश्चिम और पश्चिमी इलाका। सबसे ज्यादा खतरे वाले क्षेत्र हैं उत्तर, उत्तर पूर्व, पूर्वी क्षेत्र। भूविज्ञान मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली में अगर रिक्टर स्केल पर छह से अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो बड़े पैमाने पर जानमाल की हानि होगी। दिल्ली में आधे से अधिक इमारतें इस तरह के झटके को नहीं झेल पाएंगी। घनी आबादी की वजह से बड़ी संख्या में जनहानि हो सकती है। दुर्भाग्य की बात है कि भूकंप के खतरों को देखते हुए भी राजधानी ने सबक नहीं लिया। यहां ना तो उससे बचने के उपाय किए गए और ना ही इमारतों के निर्माण में सावधानी बरती गई है।