गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘आत्मनिर्भर नारी, सशक्त नारी’ के विजन को ग्रामीण स्तर पर साकार करने की दिशा में श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एमपीओ) पूर्वी उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण और दुग्ध कारोबार का मजबूत मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित इस एमपीओ से जुड़ी 73 हजार ग्रामीण महिलाएं आज दुग्ध व्यवसाय के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
एमपीओ से जुड़े सात जिलों के करीब 1200 गांवों में प्रतिदिन लगभग 1.50 लाख लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि दुग्ध उत्पादकों को भुगतान पारदर्शी व्यवस्था के तहत सीधे उनके बैंक खातों में किया जाता है। पिछले करीब तीन वर्षों में सदस्य महिलाओं को दूध के एवज में करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
तीन साल में 73 हजार महिलाओं से जुड़ा डेयरी नेटवर्क
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीओ का पंजीकरण 29 अगस्त 2022 को कराया था। इसके बाद राष्ट्रीय दुग्ध दिवस यानी 26 नवंबर 2023 से एमपीओ का परिचालन शुरू हुआ।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को दुग्ध व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और गांवों में संगठित, टिकाऊ एवं आत्मनिर्भर डेयरी अर्थव्यवस्था तैयार करना है। एमपीओ के सीईओ धनराज साहनी के मुताबिक, करीब तीन वर्ष के परिचालन में गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़, मऊ और संतकबीरनगर के लगभग 1200 गांवों की 73 हजार महिलाएं संगठन से जुड़ चुकी हैं।
हर 10 दिन में सीधे बैंक खाते में पहुंचता है दूध का भुगतान
एमपीओ की व्यवस्था में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है। सदस्य महिलाएं जो दूध उपलब्ध कराती हैं, उसका भुगतान प्रत्येक 10 दिन में सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होने के साथ महिलाओं को उनके दूध का पारदर्शी भुगतान मिल रहा है।
अब तक सदस्य दुग्ध उत्पादकों को करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय को मजबूती मिलने के साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ी है।
10 करोड़ रुपये का पशु ऋण, बढ़ रही पशुपालन क्षमता
एमपीओ सिर्फ दूध संग्रह तक सीमित नहीं है। दुग्ध उत्पादकों की आय और उत्पादकता बढ़ाने के लिए पशुपालन से जुड़ी सेवाओं को भी एकीकृत किया गया है। महिला दुग्ध उत्पादकों को पशु खरीदने के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने में सहयोग किया जा रहा है।
अब तक करीब 10 करोड़ रुपये का पशु ऋण वितरित कराया जा चुका है। इसके अलावा पशुओं के बेहतर पोषण, संतुलित आहार, वैज्ञानिक पशुपालन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
गांव-गांव पहुंच रही मोबाइल वेटरिनरी वैन
पशुओं के इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मोबाइल वेटरिनरी वैन का संचालन किया जा रहा है। इससे पशुपालकों को पशुओं के उपचार के लिए दूर जाने की आवश्यकता कम हो रही है।
महिला दुग्ध उत्पादकों के लिए वैज्ञानिक पशुपालन, जागरूकता और नेतृत्व विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को आधुनिक पशुपालन तकनीकों की जानकारी मिल रही है और वे दुग्ध उत्पादन को केवल पारंपरिक गतिविधि के बजाय व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ा रही हैं।
100 घरों में बायोगैस संयंत्र, गोबर से ऊर्जा और बचत
महिला दुग्ध उत्पादक परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने और पशुओं से निकलने वाले गोबर के बेहतर उपयोग के लिए एमपीओ की ओर से अब तक 100 घरेलू बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
बायोगैस संयंत्रों से परिवारों को घरेलू ईंधन की सुविधा मिल रही है। इससे ईंधन खर्च कम करने के साथ गोबर के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए घरेलू कामकाज में भी इससे सुविधा हो रही है।
दुग्ध उत्पादक परिवारों के बच्चों के लिए भी पहल
एमपीओ ने सदस्य महिलाओं के परिवारों के बच्चों के लिए भी करियर डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के बच्चों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ना है।
इस तरह एमपीओ की गतिविधियां केवल दूध उत्पादन और भुगतान तक सीमित न रहकर महिला, परिवार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के व्यापक विकास से जुड़ रही हैं।
50 महिलाएं वैज्ञानिक प्रशिक्षण के लिए जाएंगी गुजरात
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने के लिए सदस्य महिलाओं को विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिलाने की पहल भी शुरू की गई है। इसके तहत पहले चरण में 50 महिला दुग्ध उत्पादकों को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी), आणंद, गुजरात भेजा गया है।
यहां महिलाओं को वैज्ञानिक पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। इससे प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं अपने गांवों में दूसरी पशुपालक महिलाओं के लिए भी प्रेरणा और मार्गदर्शन का माध्यम बन सकती हैं।
महिला सशक्तीकरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक असर
श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीओ का मॉडल महिला सशक्तीकरण, वित्तीय समावेशन और डेयरी विकास को एक साथ जोड़ रहा है। 73 हजार महिलाओं की भागीदारी, प्रतिदिन 1.50 लाख लीटर दूध का संग्रह और करीब 300 करोड़ रुपये का सीधा भुगतान इस पहल के ग्रामीण स्तर पर प्रभाव को दर्शाता है। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए दुग्ध व्यवसाय आय का साधन बनने के साथ आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बन रहा है।