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सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा मामला AG ने सरकार द्वारा FIR से जुड़े चार्ट कोर्ट के सामने रखा गया

दिल्ली। मणिपुर हिंसा सुप्रीमकोर्ट AG ने सरकार द्वारा FIR से जुड़े चार्ट कोर्ट के सामने रखा गया। AG ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले को अपने स्तर पर सम्भाल रही है। हमने घटना से जुड़े बयानों और घटनाओं को अलग-अलग किया है।AG ने कहा कि हम जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं। फ़िलहाल हम सभी शांति की बहाली चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान कोई छोटी.सी भी चूक बहुत गहरा असर डाल सकती है।

SG ने कोर्ट को बताया कि हर जिले के मुताबिक छह SIT बनाई गई हैं। SP और DSP स्तर के अधिकारी मुकदमों की जांच की निगरानी में कि जा रही है। महिलाओं से संबंधित अपराधों की जांच के लिए बनी SIT सक्षम महिला अधिकारियों को दी गई है। SG ने कहा कि इसमे कोई संदेह नही है कि 11 FIR को CBI को दिया जाएगा, लेकिन उनके अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराध वाली FIR की भी जांच SIT करेगी।

मणिपुर सरकार की ओर से AG ने कोर्ट को बताया कि अपराधों की जांच के लिए 6 जिलों के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए 6 SIT का गठन जाएगा।साथ ही हिंसा के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए महिला पुलिस अधिकारियों की एक टीम का गठन करेगी।

वही याचिकाकर्ताओं कि और से वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि IPC की धारा 166ए के तहत भी कोई FIR दर्ज नहीं की गई है,जो कार्रवाई न करने के लिए अधिकारियों को जवाबदेही बनाती है। इसका भी ध्यान देने की जरूरत है।

वही वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा को इस मामले में दो पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। पहला मामले की जांच हो और दूसरा हिंसा पर रोकथाम दूसरा भविष्य में ऐसा कुछ न हो इसके लिए भी काम किए जाने की जरूरत है।अभी भी संघर्ष चल रहा है। इसलिए जांच के साथ-साथ अपराध की रोकथाम के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जांच के लिए कोर्ट रिटायर्ड जज की अगुआई में आयोग बनाया जाय या फिर अपनी निगरानी में जांच कराए। इसके लिए सभी संभव संसाधनों और स्रोतों का इस्तेमाल किया जाए जिसमें स्थानीय लोग, सक्षम नागरिक संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और पीड़ित लोगों में से कुछ को इसमें शामिल किया जा सकता है।

इंदिरा जयसिंह ने कहा निर्भया कांड के दौरान पता चला था कि पुलिस अपना काम ठीक से नहीं निभा रही थी। इसलिए 2012 के संशोधन द्वारा IPC में 166ए लाया गया। 166ए कहता है कि जो पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करेंगे उन्हें दंडित किया जाएगा। हम इस धारा को लागू करने की मांग कर रहे हैं।SG तुषार मेहता ने कहा जब भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली होती है। एक दिन पहले ही मणिपुर में कुछ बड़ी घटना हो जाती है।पता नहीं ये इत्तेफाक है या कुछ और।

वही SG ने शवों के हस्तांतरण के मामले पर कहा कि DGP ने बताया कि उनके पास कई नोडल अधिकारियों के नंबर हैं जो शवो सुपुर्द करे़गे । यदि कोई कठिनाई हो तो हम यहाँ हैं।वकील विशाल तिवारी ने मांग की कि कमेटी इसकी जांच करे और इसकी अध्यक्षता इस न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को करनी चाहिए।

निजाम पाशा ने कहा कि SIT का चयन राज्य द्वारा किया जाता है और कई आरोप राज्य पुलिस के खिलाफ भी हैं। राज्य मामले में सक्रिय भागीदारी से लेकर अपराध तक से जुड़वा है। ऐसे में यदि चयन राज्य कैडर द्वारा होता है तो सवाल खडे होंगे ही। इसलिए चयन सुप्रीम कोर्ट द्वारा होना चाहिए। वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन के ख़िलाफ़ ही गोला बारूद के लूट का मामला है।उन्हें लूटने की इजाजत दी गई।यह बहुत गंभीर आरोप है क्योंकि हथियारों के कारण हिंसा और बदतर हो गई।

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