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नोएडा के 3800 करोड़ के लीजबैक मामले में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र बर्खास्त

लखनऊ। नोएडा प्राधिकरण से जुड़े करीब 3,800 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। शासन ने वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी एवं नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। नियुक्ति विभाग की ओर से सोमवार को उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया। हरीश चंद्र वर्तमान में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे।

हरीश चंद्र वर्ष 2011-12 के दौरान नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव पद पर तैनात थे। उनके कार्यकाल से जुड़े मामले में ग्राम शहदरा की प्राधिकरण द्वारा अर्जित और कब्जा प्राप्त भूमि के नियमों के विपरीत लीजबैक का आरोप था। विभागीय जांच में करीब 3,81,527 वर्गमीटर भूमि के लीजबैक में अनियमितता सामने आने की बात कही गई। जांच में संबंधित जमीन की बाजार कीमत करीब 3,800 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

बाहरी लोगों और निजी कंपनियों को लीजबैक का आरोप

जांच के अनुसार शहदरा गांव से जुड़ी भूमि के सर्वे और लीजबैक प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि आबादी का निर्धारण सेटेलाइट इमेज के आधार पर किया जाना था, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया गया। सर्वे में गांव के बाहर के लोगों और निजी कंपनियों को भी शामिल किए जाने की बात जांच में सामने आई।

नियमों के अनुसार लीजबैक की सुविधा संबंधित गांव के पात्र लोगों के लिए थी और एक परिवार के लिए अधिकतम 450 वर्गमीटर भूमि की सीमा बताई गई थी। जांच में बाहरी लोगों और निजी कंपनियों को बड़े भूखंड लीजबैक किए जाने का उल्लेख है। कुछ मामलों में 175 वर्गमीटर से लेकर 15,340 वर्गमीटर तक के भूखंड लीजबैक किए जाने की बात सामने आई।

करीब चार लाख वर्गमीटर भूमि की जांच

शासन से जुड़े आदेश के अनुसार जांच में करीब 4,00,447 वर्गमीटर भूमि के अनियमित आवंटन और उससे जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई। इस भूमि का बाजार मूल्य करीब 4,000 करोड़ रुपये बताया गया। जांच में आरोप लगाया गया कि संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया और नियमों के विपरीत प्रक्रिया अपनाई गई।

मामले में विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। शासन ने 27 सितंबर 2013 को कार्रवाई की संस्तुति करते हुए जांच मेरठ मंडलायुक्त को सौंपी थी। इसके बाद विभागीय जांच आगे बढ़ी और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से भी संबंधित प्रक्रिया पूरी की गई।

लोक सेवा आयोग की सहमति और हाईकोर्ट के आदेश का भी उल्लेख

बर्खास्तगी आदेश में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की 6 जनवरी 2022 की सहमति तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में सामने आए तथ्यों का भी उल्लेख किए जाने की रिपोर्ट है। इन आधारों के बाद शासन ने हरीश चंद्र की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया।

रिपोर्टों के अनुसार नोएडा लीजबैक प्रकरण में इससे पहले भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। अब तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र की बर्खास्तगी से मामले में शासन स्तर पर एक और बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है।

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