आगरा। योगी सरकार प्रदेश के धर्म स्थलों के संरक्षण के साथ उनके जीर्णोद्धार पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसी कड़ी में पर्यटन नगरी के सबसे प्राचीन कैलाश मंदिर का कायाकल्प होने जा रहा है। काशी मथुरा की तर्ज पर अब कैलाश मंदिर कॉरिडोर की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा कायाकल्प का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जिसमें कैलाश मंदिर स्थित यमुना के घाटों का पुनर्निर्माण, भव्य प्रवेश द्वार, मंदिर के आस-पास का सौंदर्यीकरण, सड़क मार्ग का चौड़ीकरण के साथ ही जन सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।

संयुक्त निदेशक पर्यटन अविनाश चंद्र मिश्रा ने बताया कि कैलाश मंदिर के आस-पास का सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाना है। जिसमें कैलाश मंदिर का भव्य प्रवेश द्वार एनएच-19 से मंदिर मार्ग पर बनाया जा रहा है। इसके साथ ही यमुना के घाट का निर्माण, आस-पास का सौंदर्यीकरण, सड़क चौड़ीकरण व अन्य जन सुविधाएं जैसे चेंजिंग रूम, पब्लिक टॉयलेट, सीटिंग बेंच, पार्किंग आदि विकसित की जाएंगी। सड़क के किनारे घाट तक डेकोरेशन पॉल, फसाड म्यूरल लाइट से पूरे मंदिर को खूबसूरत बनाने की तैयारी है। वहीं भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य शुरू हो गया है और जल्द ही जिला प्रशासन द्वारा कैलाश मंदिर कॉरिडोर का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।

बता दें कि प्राचीन कैलाश मंदिर में भगवान शिव के दो जुड़वा शिवलिंग स्थापित है। इन दोनों ही शिवलिंग की स्थापना भगवान परशुराम और उनके पिता जमदग्नि ऋषि ने कराई थी। कैलाशपति महादेव का दरबार 10 हजार वर्ष से अधिक पुराना है। इस मंदिर में जुड़वा शिवलिंग स्थापित है, जो दुर्लभ हैं। देश में कहीं भी एक साथ एक ही आकर की जुड़वा शिवलिंग नहीं है। मंदिर से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर महर्षि परशुराम के पिता और माता का आश्रम रेणुका धाम भी मौजूद है, जिसे वर्तमान में रुनकता के नाम से जाना जाता है।