अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी और गबन के मामले में पुलिस ने बुधवार को सभी आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के बाद तैयार आरोप पत्र में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, करुणेश पांडेय समेत सभी आठ आरोपियों को शामिल किया गया है। चार्जशीट में पुलिस ने जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय साक्ष्यों को आधार बनाया है।
मामले में गिरफ्तार आठों आरोपी करीब तीन महीने से जेल में बंद हैं। 90 दिन की वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिलने का रास्ता बंद हो गया है। मंगलवार को ही अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडेय और लवकुश मिश्रा की जमानत अर्जियां विशेष एंटी करप्शन कोर्ट ने खारिज की थीं। इससे पहले मनीष यादव, अविनाश शुक्ल और रमाशंकर मिश्रा की जमानत अर्जी भी निरस्त हो चुकी है।
करीब 40 हजार पन्नों में जांच का विवरण
चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, चढ़ावा गिनती से संबंधित रजिस्टर, कर्मचारियों के बयान, बरामदगी से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक एवं वित्तीय साक्ष्य शामिल किए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट तैयार की है।
जांच में मंदिर परिसर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के अलावा चढ़ावा गिनने और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों को भी खंगाला गया। आरोपियों के बैंक खातों और लेनदेन से संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड को भी विवेचना का हिस्सा बनाया गया है।
चार्जशीट में ये आठ आरोपी नामजद
पुलिस की प्राथमिकी में नामजद सभी आठ आरोपियों के खिलाफ ही आरोप पत्र दाखिल किया गया है। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं।
जांच के मुताबिक इनमें कई आरोपी चढ़ावा राशि की गणना से जुड़े कार्यों में तैनात थे। पुलिस की केस डायरी में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कुछ आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
105 घटनाओं का भी सामने आया था जिक्र
इस मामले की जांच के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मंदिर परिसर की सीसीटीवी फुटेज में चोरी की आशंका वाली 105 घटनाएं सामने आई हैं। एसआईटी की जांच में इन घटनाओं, आरोपियों की कथित भूमिका, बरामदगी और उपलब्ध साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। चार्जशीट में लगाए गए आरोप अदालत में विचारण के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय होंगे।