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UP Politics: बसपा की चारों सदनों में खत्म होगी मौजूदगी? रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर में पूरा, राज्यसभा चुनाव ने बढ़ाई चुनौती

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के लिए एक और बड़ा सियासी बदलाव सामने आया है। लोकसभा और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहले से कोई प्रतिनिधित्व नहीं होने के बाद अब बसपा की राज्यसभा में मौजूदगी भी खत्म होने की स्थिति बन गई है। पार्टी के मौजूदा राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है और उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है।

उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में मौजूदा प्रभावी संख्या 397 है। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। बसपा के पास विधानसभा में कोई विधायक नहीं है, ऐसे में उसके लिए अपने उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने की स्थिति नहीं है।

16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी। छह अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। सात अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और नौ अक्टूबर तक नाम वापसी होगी। 16 अक्टूबर को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना होगी। चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी।

इन 10 सीटों में वर्तमान में आठ भाजपा, एक समाजवादी पार्टी और एक बसपा के पास है। बसपा की ओर से रामजी गौतम राज्यसभा सदस्य हैं। उनका कार्यकाल नवंबर में पूरा होने वाला है।

विधानसभा में भी नहीं है बसपा का कोई विधायक

बसपा के लिए चुनौती इसलिए और बड़ी है क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी का वर्तमान में कोई सदस्य नहीं है। बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह का अगस्त 2026 में निधन हो गया था। इसके बाद विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया।

लोकसभा में भी बसपा का कोई सांसद नहीं है। ऐसे में रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद संसद के दोनों सदनों में पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं रह जाएगा।

कभी यूपी की सत्ता में रही बसपा अब विधानसभा में शून्य

बसपा सुप्रीमो मायावती उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। पार्टी ने लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 2007 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। मौजूदा स्थिति में पार्टी के सामने संगठन और चुनावी प्रतिनिधित्व दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती है।

मायावती ने हाल के महीनों में पार्टी संगठन और परिवार से जुड़े नेताओं की भूमिकाओं में भी कई बदलाव किए हैं। सितंबर में उन्होंने आकाश आनंद को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं देने की बात कही थी और पार्टी के कामकाज में परिवार की भूमिका को लेकर अपने रुख को स्पष्ट किया था।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के सामने बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। उससे पहले राज्यसभा में प्रतिनिधित्व खत्म होना बसपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक स्थिति होगी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां समाप्त हो जाती हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति उसके संगठन, प्रत्याशियों, चुनावी रणनीति और मतदाताओं के समर्थन पर निर्भर करेगी।

फिलहाल राज्यसभा चुनाव के आंकड़े यह बताते हैं कि वर्तमान विधानसभा संख्या के आधार पर बसपा अपना उम्मीदवार निर्वाचित कराने की स्थिति में नहीं है। इस चुनाव के बाद पार्टी की संसद में मौजूदगी पूरी तरह खत्म होने की संभावना है।

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