अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के बढ़ते विस्तार और रोजाना उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच मंदिर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया अब अहम दौर में पहुंच गई है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने अभ्यर्थियों के अनुभव, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक दक्षता का बारीकी से मूल्यांकन किया है। चयन प्रक्रिया में भीड़ प्रबंधन, बड़े धार्मिक आयोजनों के संचालन और कर्मचारियों के नेतृत्व को विशेष महत्व दिया गया है।
34 बिंदुओं पर परखी गई अभ्यर्थियों की क्षमता
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से CEO पद के लिए तैयार मूल्यांकन प्रारूप में कुल 34 बिंदु शामिल किए गए थे। चयन समिति ने इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों से उनके प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ बड़े आयोजनों के प्रबंधन को लेकर विस्तृत सवाल पूछे। अभ्यर्थियों से यह भी जाना गया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कितने कर्मचारियों का नेतृत्व किया है। 1,000 से 5,000 या उससे अधिक कर्मचारियों की टीम संभालने के अनुभव को भी चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना गया।
बड़े आयोजनों और भीड़ प्रबंधन पर खास फोकस
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। विशेष पर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां लाखों की भीड़ जुटती है। ऐसे में CEO के चयन में भीड़ प्रबंधन को प्रमुख कसौटी बनाया गया है। इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों से पूछा गया कि उन्होंने अब तक कौन-कौन से बड़े आयोजन संभाले हैं, उनमें कितने लोग शामिल हुए, आयोजन कितने दिनों तक चला और उस दौरान उनकी भूमिका क्या रही। सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े अनुभव को लेकर भी सवाल किए गए।
18 अभ्यर्थियों में से तीन नाम होंगे शॉर्टलिस्ट
CEO पद के लिए सामने आए 18 अभ्यर्थियों में से तीन सर्वश्रेष्ठ नामों का पैनल चयन समिति तैयार करेगी। इस पैनल को निर्धारित समय सीमा के भीतर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा जाना है। इसके बाद ट्रस्ट की बैठक में अंतिम नाम पर निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, अंतिम चयन में ट्रस्ट पदाधिकारियों की राय के साथ अन्य स्तरों पर प्राप्त सुझावों को भी ध्यान में रखा जा सकता है। संघ पृष्ठभूमि से जुड़े किसी सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी के नाम की चर्चा भी सामने आ रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
20 साल का अनुभव और 50 से 70 वर्ष आयु सीमा
CEO पद के लिए अभ्यर्थियों से सामान्य प्रशासन, वित्त, मानव संसाधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में कम से कम 20 वर्ष के अनुभव की जानकारी मांगी गई थी। पद के लिए आयु सीमा 50 से 70 वर्ष निर्धारित की गई है। नियुक्ति प्रारंभिक तौर पर तीन वर्ष के लिए होगी। कार्य प्रदर्शन के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन की होगी बड़ी जिम्मेदारी
नए CEO की जिम्मेदारी राम मंदिर परिसर की दैनिक प्रशासनिक और प्रबंधकीय व्यवस्था को संभालने की होगी। इसमें विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, कर्मचारियों और मानव संसाधन का प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन, सुरक्षा व्यवस्था, जनसंपर्क, श्रद्धालुओं की सुविधाएं और भीड़ नियंत्रण प्रमुख रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा मंदिर में आयोजित होने वाले बड़े धार्मिक उत्सवों, पर्वों और विशेष आयोजनों की व्यवस्थाओं की निगरानी भी CEO के जिम्मे रहेगी।
ट्रस्ट के फैसलों को लागू करेगा CEO
CEO को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बावजूद वह स्वतंत्र रूप से नीतिगत फैसले नहीं ले सकेगा। उसकी भूमिका ट्रस्ट द्वारा तय नीतियों और निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। वित्तीय, प्रशासनिक और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में अंतिम अधिकार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ही रहेगा। CEO अपने कार्यों के लिए ट्रस्ट के प्रति जवाबदेह होगा और व्यावहारिक स्तर पर महासचिव के साथ समन्वय में काम करेगा।
महासचिव की भूमिका रहेगी महत्वपूर्ण
ट्रस्ट की संगठनात्मक व्यवस्था में महासचिव की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। बैठकों के संचालन, एजेंडा, प्रस्तावों के क्रियान्वयन की निगरानी, विभिन्न समितियों और प्रशासन के बीच समन्वय तथा ट्रस्ट के निर्णयों के अनुपालन की जिम्मेदारी महासचिव के स्तर पर रहती है। ऐसे में नए CEO के सामने चुनौती सिर्फ मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था संभालने की नहीं होगी, बल्कि बढ़ती श्रद्धालु संख्या, बड़े धार्मिक आयोजनों और विशाल प्रशासनिक तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी होगी।