लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा। अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और देश में पहले भी कई बार मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल समेत अन्य विपक्षी दलों की ओर से भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं और अंतिम गहन पुनरीक्षण के अभिलेख उपलब्ध हैं।
कांग्रेस और विपक्षी दलों की बयानबाजी पर सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस बार SIR की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस, सपा, राजद और अन्य विपक्षी दलों की ओर से जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आई है, वह उनके अनुसार दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक देश में सत्ता में रही है, इसके बावजूद वह लगातार चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रही है।
सीएम ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर उसे अपनी राजनीतिक सफलता बताया जाता है, लेकिन हार की स्थिति में चुनाव आयोग या ईवीएम को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपने बयानों और आरोपों पर आत्मावलोकन करने को कहा।
हालांकि, SIR को लेकर विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने हाल में SIR प्रक्रिया और आयोग के कामकाज में अधिक पारदर्शिता तथा सार्वजनिक जानकारी की मांग की थी।
SIR पहले भी कई बार होने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR पहली बार नहीं हो रहा है। उन्होंने वर्ष 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 समेत कई वर्षों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का उल्लेख किया।
निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों में भी विभिन्न राज्यों के लिए पूर्व में हुए Intensive Revision और उनके आधार वर्षों का विवरण दिया गया है। उत्तर प्रदेश के लिए आयोग के दस्तावेज में अंतिम Intensive Revision के संदर्भ में 1 जनवरी 2003 का उल्लेख है।
राहुल गांधी के पुराने बयानों का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विदेश में दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्षी दलों की ओर से लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर राहुल गांधी के कैंब्रिज में दिए गए बयान का संदर्भ दिया।
सीएम ने राफेल मामले में कैग की रिपोर्ट और ईवीएम को लेकर कांग्रेस के सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन ईवीएम से चुनाव हुए, उन्हीं चुनावों में केंद्र और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों को जीत मिली है। उनके अनुसार ईवीएम को लेकर लगातार संदेह पैदा करना चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने जैसा है।
आपातकाल और चुनावी संस्थाओं का मुद्दा उठाया
योगी आदित्यनाथ ने 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस दौर में विपक्षी दलों के नेताओं और राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों में चुनी हुई सरकारों को कथित तौर पर गिराए जाने और राजनीतिक अस्थिरता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कार्रवाई पर विपक्षी दलों की ओर से उठाए गए सवालों को लेकर भी आलोचना की। ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोपों के तौर पर ही सामने आईं।
फॉर्म-6 को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के दौरान छूटे हुए पात्र मतदाताओं को फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने का अवसर दिया गया है। निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर भी नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 की सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की ओर से प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद भी विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से ऐसी बयानबाजी रोकने की अपील की।
‘लोकतंत्र में हिंसा और दुष्प्रचार की जगह नहीं’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने और सरकार अथवा संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ और दुष्प्रचार के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना जाति, क्षेत्र, भाषा या लिंग के भेदभाव के मतदान का अधिकार मिला है। उनके अनुसार मतदाता सूची की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए पुनरीक्षण आवश्यक है।
विपक्ष से माफी मांगने को कहा
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से अपने बयानों को लेकर जनता तथा संवैधानिक संस्थाओं से माफी मांगने की बात कही। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।
इस बीच SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। कांग्रेस ने जहां प्रक्रिया में पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के इन सवालों को राजनीतिक आरोपों और संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया है।