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सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन, 74 वर्ष की उम्र में PGI लखनऊ में ली अंतिम सांस

लखनऊ/बलिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में 74 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से समाजवादी पार्टी समेत प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

1977 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर

राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर करीब पांच दशक लंबा रहा। उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उनका जन्म 7 सितंबर 1953 को बलिया जिले के गोसाईंपुर में हुआ था। उन्होंने विधि की पढ़ाई की और पेशे से अधिवक्ता रहे। विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार वह आठ बार विधायक निर्वाचित हुए।

उन्होंने वर्ष 1977 में पहली बार बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। इसके बाद 1980, 1985 और 1991 में भी वह विधानसभा पहुंचे। लंबे समय तक बांसडीह क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहने के साथ उन्होंने समाजवादी विचारधारा की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।

छात्र राजनीति से समाजवादी आंदोलन तक

राम गोविंद चौधरी ने राजनीति में आने से पहले छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उपलब्ध जीवनी संबंधी विवरणों के अनुसार वह बलिया के मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 1972-73 में छात्रसंघ महामंत्री और 1973-74 में अध्यक्ष रहे। इसी दौर में वह जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहे छात्र-युवा आंदोलन से जुड़े और समाजवादी विचारधारा की ओर उनका झुकाव बढ़ा।

आपातकाल के दौर में भी उन्होंने आंदोलन में भाग लिया। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया और वह बलिया के बांसडीह क्षेत्र में समाजवादी राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।

मुलायम और अखिलेश सरकार में संभाली मंत्री की जिम्मेदारी

राम गोविंद चौधरी ने प्रदेश की सरकारों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वह 2003 से 2007 तक मुलायम सिंह यादव मंत्रिमंडल में रहे। इसके बाद 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री रहे।

लंबे राजनीतिक अनुभव और विधानसभा में सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता रहा।

2017 में बने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष

2017 के विधानसभा चुनाव के बाद राम गोविंद चौधरी को उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 27 मार्च 2017 से 27 मई 2019 तक नेता प्रतिपक्ष का पद संभाला।

नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने विधानसभा में तत्कालीन सरकार की नीतियों और फैसलों पर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए। उनकी पहचान सदन में लंबे अनुभव वाले समाजवादी नेता के रूप में रही।

बलिया की राजनीति में रही मजबूत पकड़

राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक आधार बलिया का बांसडीह क्षेत्र रहा। आठ बार विधायक चुने जाने का उनका रिकॉर्ड उनके लंबे राजनीतिक जनाधार को दर्शाता है। विधानसभा के रिकॉर्ड में उनके पिता का नाम स्वर्गीय द्वारिका चौधरी और पत्नी का नाम कलावती देवी दर्ज है। उनके एक पुत्र का भी उल्लेख आधिकारिक रिकॉर्ड में है।

उनके निधन की खबर के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक का माहौल है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है।

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