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UP News: 3,567 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र, सीएम योगी बोले- नियुक्ति के बाद पैसे मांगे तो जेल में सड़ना पड़ेगा: छह महीने में एक लाख और नौकरियों का लक्ष्य

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इनमें 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता और 2,372 सहायक अध्यापक शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल नियुक्ति पत्र वितरण का नहीं, बल्कि माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था के चार प्रमुख स्तंभों को एक साथ जोड़ने का अवसर है।

मुख्यमंत्री ने नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह के लेनदेन को लेकर कड़ा संदेश देते हुए कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद यदि किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से पैसे मांगे गए तो ऐसा करने वाले को जेल जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षक को ज्वाइनिंग में परेशानी नहीं होनी चाहिए। किसी प्रबंधक को कोई समस्या या जिज्ञासा है तो वह शासन के समक्ष रखे, लेकिन नियुक्ति के बाद धन मांगने की शिकायत पर सख्त कार्रवाई होगी।

2017 से माध्यमिक शिक्षा में 48 हजार से अधिक चयन

माध्यमिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से 22 सितंबर 2026 तक अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में विभिन्न पदों पर 48,018 अभ्यर्थियों का चयन/नियुक्ति की गई है। इनमें 1,456 संस्था प्रधान, 40,955 सहायक अध्यापक और 5,607 प्रवक्ता शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्ष में करीब 9.5 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

‘हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं’

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष पर राजनीतिक हमला भी किया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार नियुक्ति पत्र देती जाएगी और विरोधी इसकी गिनती करते रहें। इसी क्रम में उन्होंने ‘सैफई सिंडिकेट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि अब प्रतिभावान युवाओं के हितों के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस कोई नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि भर्ती आयोगों और बोर्डों की दिशा-दशा सुधारने के लिए पुलिस में बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और परीक्षा की शुचिता को सरकार की प्राथमिकता बताया।

आठ लाख रुपये मांगने वाले मामले का किया जिक्र

सीएम योगी ने हाल में नियुक्ति पत्र पाने वाले एक अभ्यर्थी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस युवक ने वर्ष 2015-16 में भी इसी पद के लिए आवेदन किया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, युवक ने बताया कि उससे आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। वह खेत बेचकर रकम जुटाकर पहुंचा, लेकिन तब तक उससे अधिक पैसे देने वाला दूसरा अभ्यर्थी सामने आ गया और उसे नौकरी नहीं मिल सकी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में पूरी प्रक्रिया निरस्त हुई और अब उसी युवक को उसके आवेदन वाले पद पर नियुक्ति मिल गई है। उन्होंने इसे भर्ती व्यवस्था में बदलाव का उदाहरण बताया।

3,567 शिक्षक एक साल में 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों से जुड़ेंगे

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों की भूमिका को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि एक शिक्षक एक वर्ष में औसतन 100 विद्यार्थियों से संवाद करता है तो 3,567 शिक्षक एक वर्ष में 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों का मार्गदर्शन करना ही नए भारत की आधारशिला तैयार करना है। सरकार विद्यालयों में भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य संसाधन उपलब्ध करा सकती है, लेकिन इन संसाधनों का उपयोग कर बेहतर शोध, नवाचार और रोजगार की दिशा तैयार करने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

राम, कृष्ण, चाणक्य से लेकर मालवीय और कलाम तक का उदाहरण

सीएम योगी ने अपने संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए भगवान राम, गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र और महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राम के जीवन में गुरुजनों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

उन्होंने चाणक्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने केवल शिक्षा देने तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि चंद्रगुप्त को तैयार कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह शिक्षक की भूमिका आने वाली पीढ़ी को तैयार करने में निर्णायक है।

प्रयागराज में धरनारत युवाओं के लिए एनसीटीई को पत्र लिखने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में धरने पर बैठे युवाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंत्री से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को पत्र लिखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि एक बार के लिए इन युवाओं के लिए राहत देने अथवा ऐसी व्यवस्था बनाने पर विचार होना चाहिए, जिससे वे एक निश्चित समय के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो सकें।

उन्होंने कहा कि व्यवस्था में जड़ता युवाओं के हौसले को रोकने का काम करती है, इसलिए व्यवस्था में आवश्यक सुधार होना चाहिए।

‘नौ साल में शिक्षा व्यवस्था में हुआ बदलाव’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बेसिक और माध्यमिक शिक्षा की स्थिति खराब थी। उनके मुताबिक, विद्यालयों में भवन, शौचालय, पेयजल, स्मार्ट कक्षा और डिजिटल पुस्तकालय जैसी सुविधाओं का अभाव था।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत के माध्यम से बेसिक शिक्षा में काम हुआ है। माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत अब तक 2,300 से अधिक विद्यालयों में नए भवन और आधारभूत सुविधाएं विकसित की गई हैं।

स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं और अटल टिंकरिंग लैब का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालयों को ऐसा वातावरण देना जरूरी है, जिससे विद्यार्थियों में सीखने, प्रयोग करने और नवाचार की रुचि विकसित हो।

2047 के भारत के लिए तैयार होगी नई पीढ़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। आज 13-15 वर्ष की उम्र के विद्यार्थी 2047 में लगभग 34-36 वर्ष के होंगे और अलग-अलग क्षेत्रों में देश का नेतृत्व करेंगे।

उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें। उन्हें देश-दुनिया की घटनाओं, महापुरुषों की जीवनी और समसामयिक विषयों से भी परिचित कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक का दायित्व विद्यार्थियों को समाज को बांटने वाली नकारात्मकता से बचाना भी है।

ब्रजेश पाठक बोले- योग्यता और मेरिट के आधार पर हो रहा चयन

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने नवनियुक्त शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षक केवल बच्चों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि समाज को दिशा देने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में नियुक्तियां योग्यता और मेरिट के आधार पर की जा रही हैं और यह कार्यक्रम इसका उदाहरण है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के साथ जीवन-मूल्यों और जिम्मेदारी का बोध भी कराएं।

गुलाब देवी ने कहा- शिक्षक बच्चों के चरित्र निर्माण में भी निभाएं भूमिका

माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि चयनित अभ्यर्थियों की वास्तविक जिम्मेदारी अब शुरू हो रही है। शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। अभिभावक बच्चों को शिक्षकों के भरोसे सौंपते हैं, इसलिए शिक्षक ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण में भी योगदान दें।

उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।

मंच पर इन अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र

प्रधानाचार्य:

राम सिंह, कानपुर नगर

राघवेंद्र प्रताप सिंह, वाराणसी

प्रवक्ता:

आंचल शुक्ला, वाराणसी

अनुराग श्रीवास्तव, बरेली

प्रज्ञा सिंह, प्रयागराज

गोपाल प्रजापति, आजमगढ़

मोहम्मद शादाब, मुजफ्फरनगर

सहायक अध्यापक:

ऊषा सिंह, गोरखपुर

आकाश कुमार, संभल

रीना यादव, लखनऊ

सोनम त्रिपाठी, झांसी

अमन कुमार, कुशीनगर

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार, सचिव माध्यमिक शिक्षा किंजल सिंह समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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