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अयोध्या में 7 नवंबर को होगा 10वां दीपोत्सव, 2,100 ड्रोन दिखाएंगे रामायण की झलक

लखनऊ। अयोध्या में दीपोत्सव के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर 7 नवंबर को भव्य आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि राम की पैड़ी सहित पूरी अवधपुरी को लाखों दीपों से आलोकित किया जाए। आयोजन में धार्मिक परंपराओं, लोककलाओं और आधुनिक तकनीक का संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में 2,100 स्वदेशी ड्रोनों का रामायण आधारित शो, सरयू आरती, लेजर प्रस्तुति और अंतरराष्ट्रीय रामलीलाएं शामिल होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2017 में शुरू हुई दीपोत्सव की यात्रा आज वैश्विक पहचान बना चुकी है। उन्होंने अधिकारियों को श्रद्धालुओं और अतिथियों की सुविधा, सुरक्षा, सुगम आवागमन, प्रकाश, स्वच्छता और मार्गदर्शन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

तीन चरणों में होगा आयोजन

अपर मुख्य सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति ने मुख्यमंत्री को बताया कि दीपोत्सव तीन प्रमुख चरणों में आयोजित होगा। पहले चरण में साकेत महाविद्यालय से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें रामायण के प्रसंगों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभु श्रीराम के जीवन आदर्शों को प्रदर्शित किया जाएगा।

दूसरे चरण में रामकथा पार्क में प्रभु श्रीराम और माता सीता के स्वरूपों का प्रतीकात्मक आगमन, भरत मिलाप और श्रीराम के राज्याभिषेक से जुड़े कार्यक्रम होंगे। तीसरे चरण में सरयू आरती, दीप प्रज्ज्वलन, राम की पैड़ी पर 200 कलाकारों की प्रस्तुतियां, 2,100 ड्रोनों का आकाशीय शो, लेजर प्रस्तुति, गोंडा पुल के समीप हरित आतिशबाजी और अंतरराष्ट्रीय रामलीलाओं का मंचन किया जाएगा।

आयोजन में करीब 35 हजार स्वयंसेवकों की सहभागिता होगी। सरयू आरती में 2,147 प्रतिभागियों के शामिल होने की योजना है। इसके अलावा 3डी प्रोजेक्शन और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र होंगे। डिजिटल माध्यमों से दीपोत्सव को पांच करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

13 राज्यों के करीब एक हजार कलाकार देंगे प्रस्तुतियां

दीपोत्सव में उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम, राजस्थान, बिहार, केरल, गोवा और तेलंगाना के करीब एक हजार कलाकार अपनी लोककलाओं और नृत्य परंपराओं की प्रस्तुति देंगे। 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की सहभागिता भी प्रस्तावित है। भारत में तैनात विदेशी राजदूतों और विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पदाधिकारियों और अयोध्या के संतों के साथ समन्वय स्थापित कर तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का सहयोग लेने पर भी जोर दिया।

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर होंगे रामायण आधारित कार्यक्रम

मुख्यमंत्री ने 26 अक्टूबर को प्रस्तावित महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में मंदिरों में वाल्मीकि रामायण का अखंड पाठ कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही रामायण आधारित प्रस्तुतियां और चित्रकला गतिविधियां आयोजित करने को कहा, ताकि नई पीढ़ी को रामायण की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जा सके।

चित्रकूट के रामघाट का भी होगा विकास

बैठक में चित्रकूट के रामघाट के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का प्राथमिकता के आधार पर पुनर्विकास कराने के निर्देश दिए। उन्होंने दुकानों के व्यवस्थित पुनर्वास, नालों के सुदृढ़ीकरण और तुलसी चबूतरे के विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रामघाट के विकास में स्थानीय धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व तथा जनभावनाओं का ध्यान रखा जाए। साथ ही, भविष्य में बाढ़ की आशंका और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

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