लखनऊ। योगी सरकार की दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देने की मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से 3 से 13 अगस्त तक चलाए गए ‘दिव्यांगजन रोजगार अभियान 3.0’ के दौरान प्रदेश के सभी 75 जिलों में 1,559 दिव्यांगजन रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े। 11 दिन चले इस विशेष अभियान में रोजगार मेलों, प्लेसमेंट ड्राइव और स्वरोजगार गतिविधियों के जरिए दिव्यांगजनों को नौकरी के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं से जोड़ा गया।
1,021 दिव्यांगजनों को नौकरी, 538 ने शुरू किया स्वरोजगार
अभियान के दौरान 1,021 दिव्यांगजनों को नौकरी के अवसर मिले, जबकि 538 दिव्यांगजनों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को ऋण और उद्यम शुरू करने की जानकारी उपलब्ध कराई गई। दिव्यांगजनों को मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई-कढ़ाई, जन सेवा केंद्र, डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए।
निजी कंपनियों ने दिए नौकरी के अवसर
अभियान के तहत आयोजित रोजगार मेलों और प्लेसमेंट ड्राइव में निजी क्षेत्र की कंपनियों ने हिस्सा लिया। हेल्थकेयर, फाइनेंस, इंश्योरेंस और टेलीकॉम सहित कई क्षेत्रों में दिव्यांग अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर दिए गए। डाटा एंट्री ऑपरेटर, कस्टमर सपोर्ट एक्जीक्यूटिव, हेल्थकेयर असिस्टेंट, ड्रेसर, टेलीकॉलर, मशीन ऑपरेटर, तकनीकी सहायक और हेल्पर जैसे पदों पर चयन किया गया। चयनित अभ्यर्थियों को करीब 10 हजार से 18 हजार रुपये तक मासिक वेतन ऑफर किया गया। कई कंपनियों ने रोजगार मेलों में ही अभ्यर्थियों का चयन कर उन्हें जॉइनिंग लेटर भी प्रदान किए।
कानपुर नगर सबसे आगे, सुलतानपुर समेत इन जिलों में भी बेहतर प्रदर्शन
अभियान के दौरान कानपुर नगर 149 चयन के साथ सबसे आगे रहा। इसके अलावा आजमगढ़ में 77, अमरोहा में 69, बरेली में 63 और सुलतानपुर में 56 दिव्यांगजन रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े।
घर तक पहुंचकर की गई काउंसिलिंग
अभियान को सफल बनाने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने जरूरत पड़ने पर दिव्यांग लाभार्थियों के घर तक पहुंचकर काउंसिलिंग की। जिन लाभार्थियों से मोबाइल फोन बंद होने या अन्य कारणों से संपर्क नहीं हो सका, उनके लिए होम विजिट की गई।अधिकारियों ने दिव्यांगजनों की रुचि, योग्यता और आवश्यकता के आधार पर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के विकल्पों की जानकारी दी।
सीएम योगी का संकल्प- दिव्यांगजन बनें रोजगार देने वाले
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी दिव्यांगजन रोजगार से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन रोजगार अभियान केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य दिव्यांग युवाओं को आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से जोड़कर दिव्यांगजनों को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
75 जिलों में अभियान, आगे भी जारी रहेगा प्रयास
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि 75 जिलों में 1,559 दिव्यांगजनों का रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रयास है कि प्रत्येक दिव्यांगजन को उसकी क्षमता और रुचि के अनुरूप बेहतर अवसर मिले। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से दिव्यांगजन रोजगार अभियान 1.0 और 2.0 के माध्यम से रोजगार से जुड़े 2,000 से अधिक दिव्यांगजनों की वर्तमान स्थिति की भी ट्रैकिंग की जा रही है।