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अयोध्या चढ़ावा प्रकरण में SIT की फाइनल रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी, 25 जून को दर्ज हुई थी पहली FIR

लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावा प्रकरण में उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आवश्यक कार्रवाई के लिए श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। यह रिपोर्ट उस एसआईटी ने तैयार की थी, जिसका गठन सुप्रीम कोर्ट के मामले में हस्तक्षेप से पहले राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर किया था। एसआईटी का गठन 13 जून 2026 को किया गया था। जांच दल ने मामले की पड़ताल के बाद शासन को रिपोर्ट सौंपी थी। अब गृह विभाग ने आवश्यक कार्रवाई के साथ रिपोर्ट ट्रस्ट को उपलब्ध करा दी है।

तीन सदस्यीय SIT ने की थी जांच

मामले की जांच के लिए लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी। इसमें आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को सदस्य बनाया गया था।एसआईटी ने 23 जून को शासन को अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा था। प्रारंभिक रिपोर्ट में मामले को लेकर कई कड़े सुझाव और संस्तुतियां की गई थीं।

SIT की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई पहली FIR

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून 2026 को मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। श्रीराम जन्मभूमि थाने में दर्ज इस मुकदमे में आठ नामजद आरोपियों के अलावा अन्य अज्ञात लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया। एफआईआर ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर दर्ज की गई थी। मुकदमे का अपराध संख्या 90/2026 है।

आठ लोगों को बनाया गया नामजद आरोपी

एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद किया गया है। इसके अलावा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी अभियुक्त बनाया गया है। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

फाइनल रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट गृह विभाग द्वारा ट्रस्ट को सौंपे जाने के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज होने और अब अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने से अयोध्या चढ़ावा प्रकरण की जांच में एक और महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है।

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