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गांधी जयंती विशेष: रामनगरी अयोध्या से बापू का रहा गहरा जुड़ाव, दो बार आए थे महात्मा गांधी

अयोध्या। सत्य, अहिंसा और स्वदेशी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर आज पूरा देश उन्हें श्रद्धा से याद कर रहा है। दो अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन को सत्याग्रह और अहिंसा की ताकत दी। संयुक्त राष्ट्र ने भी गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों को वैश्विक महत्व देते हुए दो अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मान्यता दी है।

गांधीजी का रामनगरी अयोध्या से भी ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार बापू अपने जीवनकाल में दो बार अयोध्या आए थे। पहली यात्रा 10 फरवरी 1921 को हुई थी। काशी विद्यापीठ के शिलान्यास कार्यक्रम के बाद गांधीजी ट्रेन से अयोध्या पहुंचे। अगले दिन 11 फरवरी को उन्होंने सरयू तट पर साधुओं की सभा को संबोधित किया था। उस समय अस्वस्थता और थकान के कारण उन्होंने बैठकर ही अपना संबोधन दिया था।

गांधीजी की इस पहली अयोध्या यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका स्वदेशी और खादी को लेकर संदेश था। उनके भाषण में विदेशी कपड़ों के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने की बात प्रमुखता से सामने आई। अयोध्या में दिए गए उनके संबोधन का रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश के अभिलेखागार में संरक्षित होने का उल्लेख भी मिलता है।

1929 में दूसरी बार पहुंचे थे अयोध्या

बापू वर्ष 1929 में दूसरी बार अयोध्या आए। इस यात्रा का उद्देश्य हरिजन फंड के लिए सहयोग जुटाना था। उस दौरान फैजाबाद के मोतीबाग क्षेत्र में आयोजित सभा में उन्हें एक चांदी की अंगूठी भेंट की गई। गांधीजी ने उसे वहीं नीलाम कर धनराशि हरिजन फंड के लिए देने का निर्णय लिया। उनके इस दौरे में अकबरपुर स्थित गांधी आश्रम की यात्रा का भी उल्लेख मिलता है।

अयोध्या से गांधीजी का जुड़ाव केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था। राम के प्रति उनकी आस्था और उनके सार्वजनिक जीवन में ‘राम’ नाम का विशेष स्थान रहा। हालांकि गांधीजी द्वारा अयोध्या में रामलला को खादी वस्त्र पहनाने का आग्रह किए जाने जैसी कुछ बातें प्रचलित हैं, लेकिन इनके बारे में उपलब्ध स्रोतों में प्रामाणिक पुष्टि नहीं मिलती है। इसलिए इन्हें प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आज गांधी जयंती पर जब देश सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, स्वच्छता और सामाजिक समरसता के उनके संदेश को याद कर रहा है, तब रामनगरी अयोध्या में बापू की दोनों ऐतिहासिक यात्राएं स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर की याद दिलाती हैं, जब गांधीजी देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचकर लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ रहे थे। दो अक्टूबर का दिन उनके विचारों और उनके सार्वजनिक जीवन के मूल सिद्धांतों को स्मरण करने का अवसर है।

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