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Lucknow News: NHAI के तीन साल के प्रतिबंध के बाद PNC पर LDA की सख्ती, ₹194.40 करोड़ के फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर नोटिस

लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की कार्रवाई के बाद पीएनसी इंफ्राटेक को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी सख्ती शुरू कर दी है। एलडीए ने कंपनी को 18 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। मामला शहीद पथ चौराहे पर गोमती नदी के दाहिने किनारे प्रस्तावित चार लेन फ्लाईओवर, दो लूप और दो रैंप से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित लागत 194.40 करोड़ रुपये है।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एनएचएआई ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ी निर्माण संबंधी समस्याओं के बाद पीएनसी इंफ्राटेक और उसकी सहयोगी कंपनी अवध एक्सप्रेसवे को अपनी तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की नई परियोजनाओं में तीन साल तक बोली लगाने से प्रतिबंधित कर दिया है। कंपनी के खिलाफ यह कार्रवाई 3 सितंबर 2026 से प्रभावी बताई गई है और यह अनुबंध के तहत अधिकतम अवधि का प्रतिबंध है।

पहले मिला था 194.40 करोड़ का ठेका

एलडीए के इस प्रोजेक्ट के लिए पीएनसी इंफ्राटेक 7 मई 2026 को सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी एल-1 बनी थी। कंपनी ने 194.40 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। इसके बाद एलडीए की ओर से 27 मई 2026 को लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी किया गया। परियोजना को ईपीसी आधार पर 24 महीने में पूरा किया जाना है।

इसका मतलब यह है कि एनएचएआई की सितंबर वाली तीन साल की रोक से पहले ही एलडीए की परियोजना के लिए पीएनसी का चयन और अनुबंध संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। इसलिए इसे सीधे तौर पर “प्रतिबंधित कंपनी को प्रतिबंध के बाद एलडीए ने ठेका दिया” कहना उपलब्ध तारीखों के आधार पर सही नहीं होगा।

हालांकि, एनएचएआई की बाद की कार्रवाई ने इस परियोजना की गुणवत्ता, सुरक्षा और अनुबंधीय शर्तों को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में क्या हुआ?

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद उसके कुछ हिस्सों में सड़क की परत उखड़ने, स्लिपेज और अन्य निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आई थीं। एनएचएआई ने मामले की तकनीकी जांच कराई और संबंधित एजेंसियों तथा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।

इसके बाद एनएचएआई ने पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ तीन साल का प्रतिबंध लगाया। कंपनी को एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और उनकी एजेंसियों की नई परियोजनाओं में बोली लगाने से रोक दिया गया है।

एनएचएआई की कार्रवाई के बाद कंपनी की ओर से शेयर बाजार को भी इसकी जानकारी दी गई। इस घटनाक्रम के बाद कंपनी के शेयर में तेज गिरावट दर्ज की गई।

एलडीए ने पहले ही मांगा था जवाब

अब इस पूरे मामले में एलडीए का पक्ष भी सामने आया है। प्राधिकरण के अनुसार एनएचएआई की ओर से पीएनसी के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी संज्ञान में आने के बाद कंपनी को 18 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

यानी एलडीए ने भी कंपनी से स्पष्टीकरण मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। ताजा घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कंपनी की ओर से नोटिस का क्या जवाब दिया गया और उस जवाब के आधार पर एलडीए आगे क्या निर्णय लेता है।

194 करोड़ के फ्लाईओवर पर उठ रहे ये सवाल

शहीद पथ चौराहे का प्रस्तावित फ्लाईओवर लखनऊ के महत्वपूर्ण यातायात मार्ग से जुड़ा प्रोजेक्ट है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब एलडीए के सामने मुख्य सवाल ये हैं—

पहला, निविदा के समय पीएनसी की तकनीकी और वित्तीय पात्रता का किस स्तर तक परीक्षण किया गया?

दूसरा, कंपनी के पिछले बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों के प्रदर्शन का रिकॉर्ड किस स्तर तक जांचा गया?

तीसरा, एनएचएआई की कार्रवाई सामने आने के बाद कंपनी के जवाब का तकनीकी परीक्षण किस स्तर पर किया जाएगा?

चौथा, क्या 194.40 करोड़ रुपये के फ्लाईओवर प्रोजेक्ट के लिए स्वतंत्र तकनीकी गुणवत्ता परीक्षण या ऑडिट कराया जाएगा?

पांचवां, यदि कंपनी पर किसी अन्य सरकारी संस्था की कार्रवाई का परियोजना की पात्रता अथवा अनुबंध पर असर पड़ता है तो एलडीए की अनुबंधीय शर्तें क्या कहती हैं?

मामला सिर्फ ठेके का नहीं, निगरानी व्यवस्था का भी

इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एनएचएआई की कार्रवाई सिर्फ ठेका देने वाली कंपनी तक सीमित नहीं रही। एक्सप्रेसवे से जुड़े निर्माण, इंजीनियरिंग और निगरानी तंत्र की भी जांच और जवाबदेही का मामला सामने आया है।

ऐसे में एलडीए के सामने अब अपने फ्लाईओवर प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। खासकर तब, जब इसी कंपनी के दूसरे बड़े प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय एजेंसी ने गंभीर कार्रवाई की है।

हालांकि, एनएचएआई का प्रतिबंध अपने आप में एलडीए के पुराने अनुबंध को स्वतः अवैध नहीं बनाता। दोनों परियोजनाएं अलग-अलग प्राधिकरणों और अलग-अलग अनुबंधों के तहत हैं। इसलिए अंतिम स्थिति एलडीए की निविदा शर्तों, अनुबंध की धाराओं, कंपनी के जवाब और प्राधिकरण के आगामी निर्णय पर निर्भर करेगी।

फिलहाल इतना जरूर है कि 194.40 करोड़ रुपये के शहीद पथ फ्लाईओवर को लेकर एलडीए ने पीएनसी से जवाब मांग लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी अपने ऊपर लगे आरोपों और एनएचएआई की कार्रवाई के संदर्भ में क्या स्पष्टीकरण देती है और एलडीए उस जवाब के आधार पर आगे क्या कदम उठाता है।

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