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कानपुर में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को नई उड़ान, 30 करोड़ राउंड तक पहुंचेगा सालाना एम्युनिशन उत्पादन

कानपुर। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में कानपुर की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के विस्तार से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की उम्मीद है। कंपनी ने कानपुर यूनिट में उत्पादन बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने की विस्तृत योजना सामने रखी है। कानपुर यूनिट में फिलहाल करीब 15 करोड़ राउंड सालाना गोलियों का उत्पादन हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 30 करोड़ राउंड तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके साथ 2027 तक सालाना 40 लाख ग्रेनेड बनाने की क्षमता विकसित करने की तैयारी है।

250 एकड़ में होगा विस्तार, ₹2,000 करोड़ का निवेश

हाथीपुर क्षेत्र में करीब 250 एकड़ भूमि पर यूनिट के विस्तार की योजना प्रस्तावित है। कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी के अनुसार इस सुविधा पर लगभग ₹2,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। कंपनी कानपुर में पहले ही करीब ₹4,000 करोड़ का निवेश कर चुकी है। आने वाले वर्षों में लगभग ₹4,000 करोड़ अतिरिक्त निवेश की योजना भी है। प्रस्तावित विस्तार से उत्तर प्रदेश में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ लॉजिस्टिक्स और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों में भी अवसर बढ़ने की संभावना है।

अभी 2 हजार लोगों को रोजगार, विस्तार के बाद बढ़ेंगे अवसर

कानपुर स्थित डिफेंस सेंटर में वर्तमान में करीब 2,000 कुशल एवं अकुशल कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रस्तावित विस्तार के बाद रोजगार का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। कंपनी के मुताबिक इसका लाभ केवल उत्पादन इकाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़ी गतिविधियों में भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

15 करोड़ से 30 करोड़ राउंड तक पहुंचेगा उत्पादन

कानपुर की एम्युनिशन फैसिलिटी में वर्तमान में हर साल लगभग 15 करोड़ राउंड विभिन्न प्रकार की गोलियों का निर्माण किया जा रहा है। उत्पादन क्षमता को साल के अंत तक बढ़ाकर करीब 30 करोड़ राउंड करने का प्रयास किया जा रहा है। यह विस्तार देश की गोला-बारूद संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्मॉल-कैलिबर से लेकर टैंक और आर्टिलरी एम्युनिशन तक

फैसिलिटी में विभिन्न श्रेणियों के गोला-बारूद का निर्माण और असेंबलिंग की जा रही है। इनमें छोटे हथियारों के लिए स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन के साथ टैंक और आर्टिलरी सिस्टम में उपयोग होने वाला लार्ज-कैलिबर एम्युनिशन शामिल है। मीडियम-कैलिबर एम्युनिशन का उत्पादन शुरू करने की भी तैयारी है, जिसका इस्तेमाल ऑटोकैनन सहित विभिन्न हथियार प्रणालियों में किया जाता है। कंपनी के अनुसार इसका उत्पादन 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है।

2027 तक 40 लाख ग्रेनेड उत्पादन का लक्ष्य

कंपनी ने ग्रेनेड निर्माण क्षमता में भी बड़े विस्तार की योजना बताई है। वर्ष 2027 तक 40 लाख ग्रेनेड सालाना बनाने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इसके बाद 2029 तक 40 लाख यूनिट की अतिरिक्त क्षमता विकसित करने की योजना बताई गई है। इससे देश की रक्षा जरूरतों के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सामने आई आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की जरूरत

कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने देश के लिए अपनी रक्षा उत्पादन क्षमताओं को और मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संकट की परिस्थितियों में दूसरे देशों से रक्षा सामग्री पर निर्भरता चुनौती बन सकती है। ऐसे में भारत में ही पर्याप्त एम्युनिशन और हथियार प्रणालियों का उत्पादन ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देने के साथ रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए भी जरूरी है।

अभय राइफल और प्रहार LMG ने बढ़ाई ताकत

कानपुर यूनिट में हथियारों की क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों के अनुसार अभय राइफल 5.56 एमएम और 9 एमएम दोनों प्रकार के कारतूसों का इस्तेमाल करने में सक्षम है। वहीं प्रहार लाइट मशीन गन को लेकर भी अधिकारियों ने जानकारी दी। इसके अलावा पिस्टल, आधुनिक राइफल और मशीन गन सहित विभिन्न हथियार प्रणालियों को प्रदर्शित किया गया।

AI से हो रही एम्युनिशन की गुणवत्ता जांच

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। एआई आधारित केस-लाइन इंस्पेक्शन तकनीक के जरिए एम्युनिशन केस की निर्धारित मानकों के अनुसार जांच की जाती है। इस तकनीक से निरीक्षण प्रक्रिया को स्वचालित करने और उत्पादन की गुणवत्ता में सटीकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

NATO मानकों के अनुरूप निर्माण, मित्र देशों से भी मांग

कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक यहां निर्मित एम्युनिशन और आर्टिलरी सिस्टम NATO मानकों के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं। इससे विभिन्न हथियार प्रणालियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और समान प्रदर्शन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। कंपनी के अनुसार कानपुर में निर्मित एम्युनिशन की मांग अब मित्र देशों से भी सामने आ रही है। इससे कानपुर के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने और उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की सामरिक भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है।

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