नोएडा। नोएडा में लगातार बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या से निपटने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक का सहारा लेने की तैयारी है। नोएडा प्राधिकरण प्रस्तावित एआई सॉफ्टवेयर को Google Maps और मौजूदा इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ISTMS) से जोड़ने पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ यह पता लगाना नहीं होगा कि इस समय कहां जाम लगा है, बल्कि पुराने ट्रैफिक आंकड़ों का विश्लेषण कर यह समझना भी होगा कि किसी सड़क पर जाम नियमित रूप से किस समय और किन परिस्थितियों में लगता है।
प्रस्तावित व्यवस्था में मौजूदा ट्रैफिक डेटा का इस्तेमाल कर एआई किसी सड़क या क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही, जाम की अवधि और उसके पैटर्न का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को डायवर्जन, सिग्नल व्यवस्था में बदलाव या सड़क की क्षमता बढ़ाने जैसे फैसले लेने में मदद मिल सकती है।
एक-दो महीने का डेटा बताएगा जाम की असली वजह
इस सिस्टम की खासियत यह होगी कि यह केवल तत्काल ट्रैफिक स्थिति पर निर्भर नहीं रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक एआई सिस्टम करीब एक से दो महीने तक का ट्रैफिक डेटा सुरक्षित रखकर उसका विश्लेषण कर सकेगा।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी खास स्थान पर रोज कितने वाहन गुजरते हैं, किस समय ट्रैफिक दबाव बढ़ता है, जाम कितनी देर तक रहता है और किन परिस्थितियों में समस्या बार-बार सामने आती है।
यानी किसी चौराहे पर रोज शाम को जाम लग रहा है तो सिस्टम केवल जाम की सूचना नहीं देगा, बल्कि पुराने आंकड़ों के आधार पर उसके पैटर्न को भी सामने ला सकेगा।
Google Maps और कैमरों से मिलेगा डेटा
प्रस्तावित सिस्टम को Google Maps के साथ जोड़ने की योजना है। मौजूदा कैमरों की फीड और उपलब्ध ट्रैफिक जानकारी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए हर जगह नए कैमरे या नई फाइबर ऑप्टिक लाइन बिछाना जरूरी नहीं होगा।
Google पहले से भारत में एआई, स्थानीय भागीदारों और Maps समुदाय के जरिए बड़ी संख्या में ट्रैफिक एवं सड़क व्यवधान संबंधी अपडेट जुटाता है। कंपनी के मुताबिक भारत में Maps पर प्रतिदिन करीब 1.5 लाख व्यवधान संबंधी सूचनाएं समुदाय के जरिए सामने आती हैं।
जाम के बाद नहीं, पहले से तैयारी पर जोर
नोएडा में प्रस्तावित एआई व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव ट्रैफिक प्रबंधन के तरीके में हो सकता है। अभी किसी मार्ग पर जाम बढ़ने के बाद पुलिस या ट्रैफिक विभाग को हस्तक्षेप करना पड़ता है। डेटा आधारित व्यवस्था में नियमित रूप से जाम वाले मार्गों की पहचान पहले की जा सकेगी।
इसके आधार पर पीक आवर में ट्रैफिक डायवर्जन, सिग्नल टाइमिंग में बदलाव, सड़क क्षमता बढ़ाने या अन्य प्रबंधन उपायों पर फैसला लिया जा सकता है। इस तरह एआई का इस्तेमाल जाम के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय जाम के पैटर्न को पहले से समझने के लिए किया जाएगा।
यूपी में एआई से ट्रैफिक प्रबंधन का प्रयोग
उत्तर प्रदेश में भी एआई आधारित रियल टाइम ट्रैफिक प्रबंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक सात पुलिस कमिश्नरेट के 710 किलोमीटर मार्गों पर एआई आधारित आरटीसी व्यवस्था के जरिए यातायात स्थिति का विश्लेषण किया गया। इसमें Google आधारित रियल टाइम ट्रैफिक डेटा का स्वचालित विश्लेषण शामिल है और सामान्य यात्रा समय की तुलना में अधिक देरी होने पर संबंधित मार्ग को चिन्हित किया जाता है।
नोएडा में प्रस्तावित व्यवस्था इसी तरह डेटा और तकनीक के इस्तेमाल को स्थानीय ट्रैफिक प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में एक और कदम हो सकती है।
RFP जारी होने के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एसपी सिंह के अनुसार, वर्तमान में ISTMS के माध्यम से यातायात की निगरानी की जा रही है और GPS तथा Google Maps से रियल टाइम ट्रैफिक की जानकारी मिलती है। प्रस्तावित एआई सिस्टम को ISTMS से जोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए आगे RFP जारी की जा सकती है।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद नोएडा में ट्रैफिक जाम को केवल मौके पर संभालने के बजाय उसके पुराने पैटर्न और कारणों के आधार पर प्रबंधन करने की दिशा में काम हो सकेगा। हालांकि सिस्टम की वास्तविक प्रभावशीलता उसके लागू होने, डेटा की गुणवत्ता और ट्रैफिक विभाग द्वारा प्राप्त विश्लेषण के आधार पर कार्रवाई पर निर्भर करेगी।