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जन-जन की आवाज़, सच के साथ मखौड़ा संदेश

बस्ती। हिन्दी दैनिक अख़बार ‘मखौड़ा संदेश’ का पाँचवाँ स्थापना दिवस बुधवार को शहर के प्रेस क्लब सभागार में गरिमामय माहौल में मनाया गया। समारोह में जिलेभर के वरिष्ठ पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, कवियों और समाजसेवियों ने भाग लेकर समाचार पत्र की रचनात्मक यात्रा को सलाम किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में निष्पक्ष पत्रकारिता ही सबसे बड़ी चुनौती है, और मखौड़ा संदेश ने इन पाँच वर्षों में जिस ईमानदारी, साहस और जनसरोकार के साथ अपनी पहचान बनाई है, वह प्रशंसनीय है।

पत्रकारिता अगर सच के साथ है, तो वही लोकतंत्र की असली शक्ति है:प्रदीप चंद्र पाण्डेय

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप चंद्र पाण्डेय ने कहा कि आज पत्रकार के साथ न समाज है और न ही सरकार, ऐसे में अखबार निकालना किसी तपस्या से कम नहीं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को जीवित रखने के लिए हमें फिर से अपने मूल्यों की ओर लौटना होगा। स्थानीय खबरों को महत्व देना और जनता की पीड़ा को आवाज़ देना ही सच्ची सेवा हैं।

मखौड़ा संदेश ने दिखाया कि साहस और सच्चाई अभी जिंदा है, महेन्द्र तिवारी

प्रेस क्लब महामंत्री महेन्द्र तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में अखबार निकालना आसान नहीं है। मीडिया पर दबावों के बीच मखौड़ा संदेश ने जिस साहस और निष्ठा से काम किया है, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा, आज जब बड़े मीडिया घराने जनसरोकारों से दूर हो रहे हैं, तब मखौड़ा संदेश जैसी पहल लोकतंत्र की नींव को मजबूत कर रही है।

पत्रकार समाज का दर्पण और दिशा-दर्शक है,राजाराम यादव

समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजाराम यादव ने बधाई देते हुए कहा कि पत्रकार समाज का प्रमुख अंग है, जो समाज को नई दिशा देता है। उन्होंने कहा, लोकतंत्र की रीढ़ मीडिया है, और जब पत्रकार सच के साथ खड़ा होता है, तब समाज मजबूत होता है। मखौड़ा संदेश इस भूमिका को बखूबी निभा रहा है।

हर अख़बार की पहचान उसकी सच्चाई से होती है, अवधेश त्रिपाठी

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अवधेश त्रिपाठी ने कहा कि अखबार छोटा या बड़ा नहीं होता, उसकी पहचान उसके निष्पक्ष और निर्भीक समाचारों से होती है। उन्होंने कहा कि “मखौड़ा संदेश” ने हर मुद्दे को ईमानदारी से उठाया है, यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

पत्रकारिता में अब भी उम्मीद की किरण है, डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’

देश के प्रसिद्ध कवि डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि आज पत्रकारिता अनेक संकटों से गुजर रही है, लेकिन मखौड़ा संदेश जैसी आवाजें यह भरोसा दिलाती हैं कि सच बोलने वाले कलमकार अभी ज़िंदा हैं। उन्होंने कहा, जब अखबार गरीबों और शोषितों की आवाज़ बनता है, तभी समाज में न्याय की नींव मजबूत होती हैं।

चार साल में जो मुकाम, वो मेहनत और सच्चाई का नतीजा है,विवेक मिश्र

विवेक मिश्र ने कहा कि चार वर्षों में मखौड़ा संदेश ने जो मुकाम हासिल किया है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा, “यह अखबार केवल खबरें नहीं छापता, बल्कि लोगों की तकलीफें और उम्मीदें भी लिखता है। यही असली पत्रकारिता है।

अतिथियों ने दी बधाई और शुभकामनाएं

कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने ‘मखौड़ा संदेश’ के प्रधान संपादक माता प्रसाद पाण्डेय तथा समाचार संपादक विकास पाण्डेय को हार्दिक बधाई दी और उन्हें समाज के दबे-कुचले वर्गों की आवाज़ बनकर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी।पत्रकारिता केवल व्यवसाय नहीं, यह समाज की आत्मा है। मखौड़ा संदेश उस आत्मा को जिंदा रखे हुए है।कार्यक्रम में शक्ति शरण उपाध्याय ने आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई, जबकि संचालन विनोद कुमार उपाध्याय ने किया।

कार्यक्रम में शामिल गणमान्य

इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से दिलीप पाण्डेय, हरि कृष्ण त्रिपाठी, समीर चौधरी, जीत बहादुर सिंह, आनंद चौधरी, वी.के. तिवारी, साहिल, अशोक कुमार पाण्डेय, रामजीत पाण्डेय, रामकुमार पाण्डेय, विपिन पाण्डेय, निखिल पाण्डेय, दीपक पाल, रामकिशन मौर्य, नक्षत्र बलि पाण्डेय, कपिल देव, डॉ. वी.के. वर्मा, रजनीश त्रिपाठी, राकेश गिरी, अरुणेश श्रीवास्तव, दिनेश पाण्डेय, अनुराग श्रीवास्तव, श्री प्रकाश श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव, अशोक श्रीवास्तव, चंद्र प्रकाश शर्मा, अमित सिंह, रमेश चंद्र मिश्र, संदीप शुक्ल, सुभाष चंद्र पाण्डेय, सर्वेश श्रीवास्तव, राकेश तिवारी, राजेंद्र उपाध्याय, ब्रह्मदेव पाण्डेय, इमरान अली, राघवेंद्र मिश्र, वसीम अहमद, सुरेश सिंह गौतम, संतोष श्रीवास्तव, पारसनाथ मौर्य, धर्मेंद्र कुमार पाण्डेय, कार्तिकेय उपाध्याय, अफसरुल हक, सुभाष पाण्डेय आदि शामिल रहे।

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