• Tue. Sep 22nd, 2026

Ram Mandir Donation Theft: 70 नहीं, CCTV में कैद हुईं 105 चोरी की घटनाएं 25 सितंबर तक दाखिल होगी चार्जशीट

नई दिल्ली/अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एसआईटी की स्थिति रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी की 105 घटनाओं की पहचान हुई है। इससे पहले 23 जून की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ऐसी 70 घटनाओं का उल्लेख किया गया था। जांच में सीसीटीवी फुटेज के साथ आरोपियों के बयान, गवाहों की जानकारी, बरामदगी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को शामिल किया गया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एसआईटी जल्द ही आरोपपत्र दाखिल करेगी। पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है। इससे पहले आरोपपत्र दाखिल नहीं होने पर आरोपियों को वैधानिक रूप से डिफॉल्ट जमानत का अधिकार मिल सकता है। इसी वजह से जांच दल दो दिन के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है।

105 घटनाओं में कितनी रकम गई, चार्जशीट से खुलेगा पूरा हिसाब

एसआईटी ने मंदिर परिसर में चढ़ावे की रकम की गिनती से लेकर उसके सुरक्षित जमा किए जाने तक की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में रखा है। जांच के अनुसार कीमती वस्तुओं की रसीद सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जाती है और बाद में उन्हें एसबीआई के लॉकर में रखा जाता है।

केस डायरी में सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों के बयान, गवाहों की जानकारी, बरामद नकदी और अन्य सामग्री को साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है। जांचकर्ताओं ने डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री का विश्लेषण कर कथित घटनाओं और आरोपियों की भूमिका को जोड़ने का प्रयास किया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 105 घटनाओं में कुल कितनी रकम और कितने कीमती सामान की कथित चोरी हुई, प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी और कुल कितनी रकम बरामद हुई। इन सवालों का विस्तृत ब्योरा चार्जशीट में सामने आने की उम्मीद है।

अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार, 79.85 लाख रुपये की बरामदगी

मामले में अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमा शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। जांच में आरोपियों से करीब 79.85 लाख रुपये की नकदी और अन्य संपत्ति की बरामदगी की बात सामने आई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों में कुछ लोग चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रिया में काम करते थे। हालांकि प्रत्येक आरोपी की भूमिका और कथित अपराध में उसकी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट की प्रति देने से किया इनकार

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से एसआईटी की स्थिति रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने मामले को संबंधित निचली अदालत की प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया और कहा कि आवश्यकता होने पर आगे उचित आदेश दिए जा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी की स्थिति रिपोर्ट में जांच की प्रगति, गिरफ्तारियों, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों से जुड़ी जानकारी पर गौर किया।

तीन आरोपियों की जमानत खारिज, पांच पर सुनवाई

उधर, अयोध्या में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा की अदालत ने सोमवार को रमा शंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव और अविनाश शुक्ला की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। तीनों की जमानत याचिकाएं पांच सितंबर से विचाराधीन थीं।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि कथित चोरी और गबन सुनियोजित तरीके से किया गया। वहीं बचाव पक्ष ने बरामद धनराशि और आरोपों से जुड़े अन्य बिंदुओं पर सवाल उठाए तथा आरोपियों को राहत दिए जाने की मांग की।

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की जमानत अर्जियों पर भी अदालत में सुनवाई होनी है। आरोपियों पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की कार्यवाही के बाद होगा।

चढ़ावा चोरी मामले में अब अगली नजर चार्जशीट पर

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एसआईटी की स्थिति रिपोर्ट में 105 कथित चोरी की घटनाओं का सामने आना जांच का महत्वपूर्ण नया बिंदु है। अब चार्जशीट में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इन घटनाओं में कथित तौर पर कितनी धनराशि या वस्तुएं गईं, आरोपियों के बीच क्या भूमिका थी और जांच एजेंसी ने किन साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय किए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया है कि आरोपपत्र 25 सितंबर से पहले दाखिल किया जाएगा। इसके बाद मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया में आरोपों और साक्ष्यों की विस्तृत तस्वीर सामने आएगी।

Leave a Reply